Delhi Pollution: दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार आगामी 1 नवंबर से विंटर एक्शन प्लान लागू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की घोषणा के मुताबिक, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-VI से नीचे के उत्सर्जन मानकों वाली गाड़ियों की एंट्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के बिना ईंधन नहीं देने, सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 फीसद वर्क फ्रॉम होम, दफ्तरों की टाइमिंग में बदलाव और निर्माण स्थलों की AI कैमरों से निगरानी जैसे उपाय शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने से पहले ही कदम उठाकर वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण कार्यों की धूल और ट्रैफिक के दबाव को कम करने की कोशिश की जाएगी।
1 नवंबर से किन गाड़ियों पर लग सकती है रोक?
घोषणा के अनुसार, दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड ऐसे वाहन जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते, उन्हें 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक राजधानी में एंट्री की अनुमति नहीं देने की योजना है। ऐसे में BS-III और BS-IV मानकों वाले वाहनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली में रजिस्टर्ड वाहनों और अलग-अलग श्रेणियों के लिए नियमों की लागू शर्तें आधिकारिक आदेश से स्पष्ट होंगी। इसलिए वाहन मालिकों को यात्रा से पहले संबंधित सरकारी एडवाइजरी जरूर जांच लेनी चाहिए।
वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं तो पेट्रोल-डीजल नहीं
विंटर एक्शन प्लान के तहत 'नो वैलिड PUCC, नो फ्यूल' नीति भी लागू करने की बात कही गई है। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं रखने वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल देने पर रोक लगाई जाएगी। ऐसे में आपको सलाह दी जाती है कि अपने PUC सर्टिफिकेट की वैलिडिटी की जांच कर लें और समय रहते उसे अपडेट करा लें।
निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर सख्ती
सर्दियों में धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाले बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर रोक रहेगी। वहीं, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध की योजना है। निर्माण स्थलों की निगरानी AI तकनीक वाले कैमरों से की जाएगी, जिनकी फीड सरकारी कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से जोड़ी जाएगी।
सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 फीसद वर्क फ्रॉम होम
ट्रैफिक और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 फीसद कर्मचारियों के वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू करने की घोषणा भी की गई है। इसके साथ ही दफ्तरों की टाइमिंग अलग-अलग रखने का फैसला किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली नगर निगम (MCD) के दफ्तर सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक चलेंगे। इन उपायों का उद्देश्य पीक आवर्स में सड़कों पर वाहनों का दबाव घटाना है।
पार्किंग शुल्क दोगुना, पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर
विंटर एक्शन प्लान के तहत अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क 1 नवंबर से 28 फरवरी तक दोगुना करने की भी घोषणा की गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के पार्किंग स्थलों को इस बढ़ोतरी से छूट दी जाएगी। सरकार इलेक्ट्रिक बसों, मेट्रो, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और कारपूलिंग को भी बढ़ावा देना चाहती है, ताकि निजी वाहनों का इस्तेमाल कम हो सके।
कब तक लागू रहेगा दिल्ली का विंटर एक्शन प्लान?
दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगा। हालांकि, बाहर रजिस्टर्ड BS-VI से नीचे के वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध की अवधि 31 जनवरी 2027 तक बताई गई है। इस प्रतिबंध में CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए छूट दी जाएगी।
सरकार का जोर वाहनों से निकलने वाले धुएं के साथ-साथ निर्माण की धूल और ट्रैफिक से होने वाले प्रदूषण को कम करने पर है। इन उपायों का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नियमों को जमीन पर कितने प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।
