Lawrence Bishnoi Gang: लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नेटवर्क फिर से एक्टिव होने की बात सामने आ रही है। गैंग का मालिक लॉरेंस बिश्नोई जेल में बंद है, लेकिन बाहर उसके नाम पर काम करने वाले चार नए चेहरे सामने आए हैं - रणदीप मलिक, हैरी बॉक्सर, अनिल पंडित और आरजू बिश्नोई। ये लॉरेंस की क्राइम कंपनी के चार नए डायरेक्टर बताए जा रहे हैं। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क से जुड़े इन नामों के बीच अब नए लड़कों की भर्ती, टारगेट की रेकी और हथियारों के इंतजाम से जुड़ी कड़ियां जांच के दायरे में हैं। बताया जा रहा है कि गैंग का प्रमुख लॉरेंस बिश्नोई जेल में बंद है, जबकि उसके नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग अलग-अलग जगहों पर आपराधिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। जिस नेटवर्क के कमजोर पड़ने की बात कही जा रही थी, उसके दोबारा सक्रिय होने के संकेत टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस की जांच में सामने आए हैं।
कुणाल का नाम सबसे अहम
इस पूरे मामले में कुणाल का नाम अहम है। जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक, कुणाल को रणदीप मलिक का शूटर बताया जा रहा है। जेल से बाहर आने के बाद वह सोशल मीडिया के जरिए दोबारा गैंग के संपर्क में आया। इसके बाद कथित तौर पर अनिल पंडित के कहने पर उसने पंजाब और हरियाणा में कई जगहों की रेकी की। हथियार जुटाने से लेकर नए युवाओं को नेटवर्क से जोड़ने तक, कुणाल की भूमिका की जांच की जा रही है।
पानीपत में धमकी से मार्च 2026 की फायरिंग तक कुणाल का नाम
कुणाल का नाम पहले भी आपराधिक गतिविधियों में सामने आ चुका है। जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक, पानीपत में एक मनी एक्सचेंजर को धमकी देने के मामले में उसका नाम सामने आया था। बताया जाता है कि रणदीप मलिक की ओर से धमकी दिए जाने के बाद मार्च 2026 में कुणाल और दो अन्य आरोपियों ने फायरिंग की थी। इस मामले में कुणाल को जेल जाना पड़ा। उस दौरान हरियाणा की जेल व्यवस्था से जुड़ी पाबंदियों के चलते उसकी गतिविधियां सीमित रहीं। हालांकि, जुलाई में जेल से बाहर आने के बाद उसने कथित तौर पर दोबारा अपने संपर्क सक्रिय करने शुरू कर दिए। जांच एजेंसियां अब उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, जेल से बाहर आने के बाद की गतिविधियों और गैंग के दूसरे सदस्यों के साथ उसके संपर्कों की कड़ियां जोड़ रही हैं।
सोशल मीडिया बना गैंग में वापसी का जरिया
जेल से बाहर आने के बाद कुणाल ने सोशल मीडिया के जरिए दोबारा संपर्क बढ़ाया। जांच से जुड़े इनपुट के अनुसार, इसी दौरान वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क से फिर जुड़ा और उसकी बातचीत अनिल पंडित से शुरू हुई। आरोप है कि अनिल पंडित ने कुणाल को अलग-अलग जगहों की रेकी करने की जिम्मेदारी दी। उसे संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाने के लिए कहा गया, लेकिन वास्तविक टारगेट की पहचान उससे छिपाकर रखी गई। इस तरीके से रेकी करने वाले व्यक्ति और वास्तविक निशाने की जानकारी रखने वाले लोगों के बीच भूमिका अलग रखे जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में निर्देश कौन दे रहा था और किस स्तर पर टारगेट की जानकारी साझा की जाती थी।
पंजाब और हरियाणा में कई जगहों की रेकी
जांच के मुताबिक, कुणाल से पंजाब और हरियाणा में कई जगहों की रेकी करवाई गई। उसे संभावित लोकेशन और ठिकानों के बारे में जानकारी जुटाने का काम सौंपा गया था। बताया जा रहा है कि रेकी के दौरान उसे यह नहीं बताया जाता था कि आखिर निशाना कौन है। इससे जांच में यह सवाल अहम हो गया है कि कुणाल को किस तरह के निर्देश दिए गए थे और उसे वास्तविक टारगेट के बारे में कब जानकारी मिली। जांच एजेंसियां रेकी के दौरान इस्तेमाल किए गए संपर्कों, लोकेशन और आपसी बातचीत की पड़ताल कर रही हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पूरी योजना किसके निर्देश पर आगे बढ़ रही थी।
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अमृतसर से हथियार जुटाने की जिम्मेदारी
रेकी के बाद कुणाल को हथियारों का इंतजाम करने की जिम्मेदारी भी दिए जाने की बात सामने आई है। जांच से जुड़े इनपुट के अनुसार, हथियार अमृतसर से जुटाए गए थे। टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में जिगाना पिस्टल को बैकअप वेपन के तौर पर मुहैया कराए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस पिस्टल की सप्लाई किसने की, इसे किस रास्ते से लाया गया और पूरी सप्लाई चेन में कौन-कौन शामिल था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। हथियारों की उपलब्धता और उन्हें शूटरों तक पहुंचाने वाले लोगों की पहचान इस मामले की जांच का अहम हिस्सा है।
दो महिलाओं को भी किया गया हायर
हथियारों की सप्लाई से जुड़े इस नेटवर्क में दो महिलाओं की भूमिका भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि दोनों महिलाओं को इस काम के लिए हायर किया गया था। इनमें से एक महिला मारुति शोरूम में ऑफिस अटेंडेंट के तौर पर काम करती थी। जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक, दोनों महिलाओं ने हथियारों की डिलीवरी और नेटवर्क से जुड़े कामों में भूमिका निभाई। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है किसके निर्देश पर इन दोनों महिलाओं को जोड़ा गया। इन दोनों महिलाओं की भूमिका से हथियारों की सप्लाई के पीछे मौजूद नेटवर्क की अन्य कड़ियों का पता लग सकता है।
सोनीपत के बहालगढ़ के पास होटल में हुई मुलाकात
जांच से जुड़े इनपुट के अनुसार, कुणाल की सोनीपत में बहालगढ़ के पास स्थित एक होटल में मुलाकात भी हुई थी। इस मुलाकात में कौन-कौन मौजूद था, किस मुद्दे पर बातचीत हुई और इसका टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस से क्या संबंध था, इन पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। होटल में हुई मुलाकात को नेटवर्क के सदस्यों के बीच संपर्क और समन्वय की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। जांच एजेंसियां इस मुलाकात से जुड़े तथ्यों को दूसरे डिजिटल और आपराधिक साक्ष्यों के साथ मिलाकर देख रही हैं।
टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के कुछ सेकेंड बाद अनिल पंडित को कॉल
इस मामले का सबसे अहम पहलू शूटरों और कथित हैंडलर के बीच फायरिंग के तुरंत बाद हुई बातचीत है। जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग करने के महज कुछ सेकेंड बाद शूटरों ने सिग्नल ऐप के जरिए अनिल पंडित को कॉल किया और बताया कि फायरिंग कर दी गई है। इसके बाद अनिल पंडित ने कथित तौर पर कुणाल को बताया कि हथियार फिल्मी सितारों पर फायरिंग के लिए मंगवाए गए थे। इस घटनाक्रम से जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े हुए हैं। क्या कुणाल को पहले से केवल रेकी और हथियारों के इंतजाम की जानकारी दी गई थी? क्या वास्तविक टारगेट की पहचान उससे जानबूझकर छिपाई गई थी? और फायरिंग के बाद उसे पूरी योजना के बारे में बताया गया? इन सवालों के जवाब कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर तलाशे जा रहे हैं।
बातचीत के लिए VPN और डिजिटल संपर्कों की जांच
आरोपियों के बीच बातचीत के लिए VPN का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। जांच एजेंसियां सोशल मीडिया पर हुई बातचीत, सिग्नल ऐप के जरिए संपर्क और अन्य डिजिटल गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कुणाल को निर्देश कहां से मिल रहे थे, अनिल पंडित के साथ उसका संपर्क कब और कैसे स्थापित हुआ तथा रणदीप मलिक सहित दूसरे कथित गैंग सदस्यों की भूमिका क्या थी। डिजिटल कम्युनिकेशन के विश्लेषण से यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि रेकी, हथियारों के इंतजाम और फायरिंग के बीच किस तरह समन्वय बनाया गया था।
गैंग में नए लड़कों की भर्ती, सुमित भी गिरफ्तार
जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक, कुणाल ने गैंग के नेटवर्क में कई नए युवाओं को भी भर्ती किया था। उसके खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी है। कुणाल के साथ रहने वाले सुमित को भी गिरफ्तार किया गया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुमित की भूमिका क्या थी और वह रेकी, हथियारों की सप्लाई या फायरिंग की कथित साजिश से किस हद तक जुड़ा हुआ था। सुमित की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा उन दूसरे युवाओं तक भी बढ़ सकता है, जिन्हें कथित तौर पर इस नेटवर्क से जोड़ा गया था।
जेल में गैंग का प्रमुख, बाहर नेटवर्क को एक्टिव करने की कोशिश?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क को लेकर है। गैंग के प्रमुख के जेल में बंद होने के बावजूद रणदीप मलिक, हैरी बॉक्सर, अनिल पंडित और आरजू बिश्नोई जैसे नामों का सामने आना इस बात की जांच को अहम बनाता है कि अलग-अलग सदस्य किस स्तर पर काम कर रहे हैं। कुणाल की कथित भूमिका, सोशल मीडिया के जरिए संपर्क, पंजाब और हरियाणा में रेकी, अमृतसर से हथियार जुटाने का काम, दो महिलाओं की भूमिका और फायरिंग के तुरंत बाद हुई कॉल — ये सभी कड़ियां जांच के केंद्र में हैं। हालांकि, इन सभी व्यक्तियों की भूमिकाओं और आपसी संबंधों को अंतिम रूप से स्थापित करने के लिए जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होंगे।
जांच एजेंसियों के सामने पांच बड़े सवाल
1. कुणाल को टारगेट की जानकारी कब मिली? क्या उसे शुरुआत में केवल रेकी और हथियार जुटाने का काम दिया गया था?
2. अनिल पंडित और रणदीप मलिक की भूमिका क्या थी? निर्देश देने, शूटरों से संपर्क रखने और नेटवर्क को सक्रिय करने में किसकी क्या भूमिका थी?
3. जिगाना पिस्टल कहां से आई? अमृतसर से हथियार जुटाने के पीछे कौन था और हथियारों की सप्लाई चेन कहां तक फैली है?
4. दोनों महिलाओं को किसने हायर किया? हथियारों की डिलीवरी और दूसरे कामों में उन्हें क्या जिम्मेदारी दी गई थी?
5. सुमित और नए युवाओं की क्या भूमिका थी? क्या वे रेकी, हथियारों की सप्लाई या फायरिंग से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा थे?
कुल मिलाकर, टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस की जांच अब केवल शूटरों तक सीमित नहीं है। कुणाल की कथित भूमिका से लेकर अनिल पंडित के साथ संपर्क, रणदीप मलिक के नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई और नए युवाओं की भर्ती तक, जांच एजेंसियां उन सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं, जिनसे यह पता चल सके कि कथित तौर पर कमजोर पड़ चुका गैंगस्टर नेटवर्क दोबारा कैसे सक्रिय हुआ।
