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फर्जीवाड़े में फंसा रिटायर्ड फौजी 70 दिन जेल में रहा, तीन साल बाद पकड़ा गया असली ठग

दिल्ली में वर्ष 2023 में सामने आए वाहन ठगी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने लंबी अंतरराज्यीय कार्रवाई के बाद मुख्य आरोपी को उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से गिरफ्तार कर लिया है। इस ठगी के चलते एक रिटायर्ड आर्मी जवान और उनके पिता को जेल जाना पड़ा था। जांच में फर्जी दस्तावेज, नकली पहचान और बैंक लोन छिपाकर वाहन बेचने की साजिश सामने आई है।

Delhi vehicle fraud case

तीन साल बाद पकड़ा गया असली आरोपी (AI Image)

दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2023 में सामने आए एक बड़े वाहन ठगी मामले के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही वह मामला सुलझ गया है, जिसमें एक रिटायर्ड फौजी और उनके बुजुर्ग पिता को जेल तक जाना पड़ा था। पुलिस के अनुसार, लंबी अंतरराज्यीय कार्रवाई के बाद आरोपी को उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से दबोचा गया।

जंगलों में छिपा था आरोपी

गिरफ्तार आरोपी की पहचान हरदीप सिंह रंधावा के रूप में हुई है। उसे 4 जनवरी की तड़के करीब 3:45 बजे पीलीभीत के गजरौला थाना क्षेत्र के भोपालपुर गांव से पकड़ा गया। पुलिस टीमों ने नेपाल सीमा से सटे शिवालिक पहाड़ियों के जंगलों में कई दिनों तक अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस को घने जंगल, मोबाइल नेटवर्क की अनुपलब्धता, ठंड और जंगली जानवरों के खतरे जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, रंधावा पिछले तीन वर्षों से फरार था और उस पर उत्तर प्रदेश में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

रिटायर्ड फौजी की शिकायत से खुला था ठगी का जाल

यह मामला एक रिटायर्ड आर्मी जवान की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिन्होंने सेना से सेवानिवृत्ति के बाद पुराने वाहनों का कारोबार शुरू किया था। फरवरी 2023 में आरोपी ने खुद को हरप्रीत सिंह रंधावा बताकर एक वाहन बेचने का सौदा किया। दस्तावेज़ सही दिखाए गए और करीब 14.5 लाख रुपये में डील तय हुई। बाद में यह वाहन पंजाब में बेचा गया, लेकिन कुछ महीनों बाद पता चला कि गाड़ी पर पहले से बैंक लोन बकाया था। जब तक सच्चाई सामने आई, आरोपी फरार हो चुका था।

बेगुनाही साबित करने में बीते 70 दिन

सितंबर 2024 में वाहन खरीदार पंजाब पुलिस के साथ रिटायर्ड फौजी की दुकान पर पहुंचा, जिसके बाद फौजी और उनके पिता को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों को करीब 70 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा। आखिरकार उन्हें भारी रकम चुकाकर मामला निपटाना पड़ा। जांच में सामने आया कि वाहन फर्जी आधार कार्ड और नकली दस्तावेजों के जरिए खरीदा गया था। पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि उसके साथी ने फर्जी पहचान बनाकर इस पूरे फ्रॉड को अंजाम दिया।

अब आरोपी सलाखों के पीछे, जांच जारी

दिल्ली पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट पहले ही जारी हो चुके थे। उसकी गिरफ्तारी से न सिर्फ एक बड़ा वाहन फ्रॉड नेटवर्क बेनकाब हुआ है, बल्कि एक रिटायर्ड सैनिक और उसके परिवार को मिले अन्याय की परतें भी खुली हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

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 Nishant Tiwari
Nishant Tiwari author

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृ... और देखें

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