Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली की व्यस्त सड़कों पर इन दिनों कुछ युवाओं और प्रैंकस्टर्स का एक बेहद खतरनाक और क्रूर 'डिजिटल प्रैंक' चर्चा का विषय बना हुआ है। यह तथाकथित मजाक दिल्ली की जीवन रेखा बन चुके ई-रिक्शा (टिर्री) के गरीब चालकों के लिए काल बन गया है। दरअसल, कुछ टेक-सैलरी युवा 'BAT-BMS' नाम के एक मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके सड़क पर चल रहे ई-रिक्शा की ब्लूटूथ-सक्षम लिथियम बैटरी को हैक कर रहे हैं और चलती गाड़ी का पावर स्विच बंद कर दे रहे हैं। इसी कारण से सोशल मीडिया पर इसे टिर्री किलर ऐप कहा जा रहा है।
बाजार में मौजूद नामी और प्रमुख ब्रांड्स की जो फैक्टरी-सिक्योर्ड या प्रोप्रायटरी बैटरियां हैं, वे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। यह खतरा केवल उन्हीं गाड़ियों पर है जिनमें बिना पासवर्ड सुरक्षा वाले सस्ते, थर्ड-पार्टी आफ्टरमार्केट बैटरी सिस्टम लगे हुए हैं।
जब रो पड़ा पीड़ित ड्राइवर
इस डिजिटल 'क्रूरता' के पीछे छिपे मानवीय दर्द को जब सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स ने उजागर करना शुरू किया, तब जाकर इस मामले ने तूल पकड़ा। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अमान सिद्दीकी ने एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना का जिक्र किया। अमान ने बताया, "मैंने सड़क पर एक व्यक्ति को देखा जो अपनी बंद पड़ी टिर्री को दूसरी गाड़ी से बांधकर खींचने की कोशिश कर रहा था। मुझे तुरंत शक हुआ कि इसके पीछे वही ऐप हो सकता है। मैंने अपनी गाड़ी उसके पीछे रोकी और अपने फोन के ऐप से उसके रिक्शे की बैटरी को कनेक्ट करने की कोशिश की। जैसे ही कनेक्शन हुआ, मैंने उसे रुकने को कहा और बताया कि अब उसका रिक्शा फिर से चालू हो जाएगा।"
अमान ने आगे बेहद भावुक होते हुए कहा कि वह ड्राइवर फूट-फूट कर रोने लगा। उसने बताया कि वह सुबह से परेशान था और उसका करीब 400 से 500 रुपये का नुकसान हो चुका था। वह रिक्शा भी उसने किराए पर लिया था। मैं खुद भावुक हो गया कि एक गरीब का रिक्शा पूरे दिन एक ही जगह खड़ा रहा और वह कमा नहीं पाया। लोग जो प्रैंक के नाम पर कर रहे हैं, वह बेहद गलत और पाप है।
तमाम ड्राइवर इस डिजिटल सेंधमारी से अनजान हैं और अपनी अचानक 'डेड' हो चुकी गाड़ियों को ठीक कराने के लिए मैकेनिकों या राहगीरों को अपनी जेब से फालतू पैसे दे रहे हैं।
दिल्ली परिवहन विभाग ने शुरू की जांच
वायरल वीडियो और बढ़ती शिकायतों के बाद दिल्ली का परिवहन विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। विभाग ने 'BAT-BMS' और 'Epoch Li-ion' दोनों मोबाइल एप्लिकेशन्स के खिलाफ एक आपातकालीन और त्वरित जांच शुरू कर दी है। दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इन एप्लिकेशन्स से जुड़े तकनीकी जोखिमों की समीक्षा कर रहे हैं। सरकार अब बिना सुरक्षा वाले बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) पर संभावित प्रतिबंध लगाने या उन्हें अनिवार्य रूप से पासवर्ड-प्रोटेक्टेड बनाने के नियमों पर विचार कर रही है।
इंटरनेशनल कमीशन ऑन साइबर सिक्योरिटी लॉ के चेयरमैन पवन दुग्गल ने इस मामले पर कहा कि, आज एक ई-रिक्शा सिर्फ ई-रिक्शा नहीं है, बल्कि एक कंप्यूटर सिस्टम है। मैं स्पष्ट रूप से मानता हूं कि यह कोई खेल नहीं, बल्कि अपराध है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 43 के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 66 के तहत यह एक दंडनीय अपराध है, क्योंकि इसमें लोग ई-रिक्शा मालिक की जानकारी या सहमति के बिना उसके कंप्यूटर सिस्टम में प्रवेश करते हैं। यदि यह कार्य बेईमानी या धोखाधड़ी की नीयत से किया जाता है, तो इसके लिए तीन साल तक की कैद और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
