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विदेश से कॉल, दिल्ली का नंबर… ऐसे लूट रहे थे लोग! दिल्ली SIM बॉक्स गैंग का भंडाफोड़

दिल्ली पुलिस का कहना है कि ये पूरा खेल SIM बॉक्स (GSM गेटवे) के जरिए चल रहा था। आसान भाषा में समझें तो ये मशीन विदेश से आने वाली कॉल को भारत के लोकल नंबर में बदल देती थी। यानी कॉल बाहर से आती थी, लेकिन आपको लगता था कि कोई दिल्ली या भारत से ही कॉल कर रहा है।

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दिल्ली सिम बॉक्स गैंग का भंडाफोड़

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े साइबर फ्रॉड गैंग का पर्दाफाश किया है, जो देश-विदेश से बैठकर लोगों को ठग रहा था। इस गैंग के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और इनके पास से कई उपकरण बरामद हुए हैं। ये पूरा खेल SIM बॉक्स (GSM गेटवे) के जरिए चल रहा था। आसान भाषा में समझें तो ये मशीन विदेश से आने वाली कॉल को भारत के लोकल नंबर में बदल देती थी। यानी कॉल बाहर से आती थी, लेकिन आपको लगता था कि कोई दिल्ली या भारत से ही कॉल कर रहा है।

गैंग का तरीका काफी खतरनाक था। ये लोग खुद को पुलिस, CBI या कस्टम अधिकारी बताकर कॉल करते थे। फिर लोगों को डराते थे कि उनके खिलाफ FIR दर्ज है और उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। बाद में बात बदलकर कहते थे कि गलती से नाम आ गया है और मामले को सुलझाने के लिए पैसे “RBI अकाउंट” में ट्रांसफर करने होंगे। इसी तरह लोगों से लाखों रुपये ठगे जाते थे।

यह पूरा रैकेट दिल्ली के मयूर विहार फेज-3 की GD कॉलोनी में एक किराए के फ्लैट से चल रहा था। जांच में सामने आया कि इसके तार कंबोडिया और साउथ-ईस्ट एशिया तक जुड़े हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में वैभव राज और अनिल कुमार नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों मिलकर इस पूरे नेटवर्क को चला रहे थे।

पूछताछ में पता चला कि वैभव राज SIM बॉक्स चलाता था, इंटरनेट कनेक्शन उसके नाम पर था और वह AnyDesk के जरिए विदेश में बैठे ठगों को एक्सेस देता था। वहीं अनिल कुमार ने फ्लैट किराए पर लिया था और वह पैसों के लेन-देन के साथ-साथ SIM कार्ड और डिवाइस की व्यवस्था करता था।

ये चीजें बरामद

छापेमारी में पुलिस को एक एक्टिव SIM बॉक्स, 350 से ज्यादा SIM कार्ड, लैपटॉप, मोबाइल फोन, इंटरनेट उपकरण, बैंक चेकबुक और कई कूरियर पैकेट मिले हैं। इससे साफ है कि यहां से पूरा ठगी का सेटअप चल रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह कंबोडिया में बैठे इंटरनेशनल साइबर सिंडिकेट के लिए काम कर रहा था और भारत में केवल उनके नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था।

पुलिस ने लोगों को सावधान करते हुए कहा है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे नहीं मांगती। “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई नियम नहीं होता और RBI कभी पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहता। अगर इस तरह का कोई कॉल आए तो तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करें।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और इस मामले में आगे भी जांच चल रही है।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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