3 टीमें और 300 CCTV... दिल्ली पुलिस ने 12 घंटों में सुलझाया नाबालिग से दुष्कर्म का केस; आरोपी गिरफ्तार
- Authored by: मोहित ओमEdited by: Nishant Tiwari
- Updated Jan 22, 2026, 11:38 PM IST
दिल्ली पुलिस ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के एक बेहद संवेदनशील मामले को महज 12 घंटे में सुलझाकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। तीन विशेष टीमों की रणनीतिक जांच, 300 से अधिक CCTV फुटेज की छानबीन और जमीनी स्तर पर की गई सटीक कार्रवाई के दम पर पुलिस ने न सिर्फ आरोपी को पकड़ा, बल्कि वारदात में इस्तेमाल ई-रिक्शा और अहम सबूत भी बरामद किए।
लाल ई-रिक्शा बना बड़ा सुराग (सांकेतिक चित्र: iStock)
Delhi News: दिल्ली पुलिस ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के बेहद संवेदनशील मामले को महज 12 घंटे में सुलझा लिया। पूरी तरह से ब्लाइंड और सुरागविहीन इस केस में पुलिस ने न सिर्फ आरोपी को गिरफ्तार किया, बल्कि वारदात में इस्तेमाल ई-रिक्शा और अहम सबूत भी बरामद किए।
ऐसे सामने आया मामला
11 जनवरी 2026 की रात करीब 1:30 बजे एलएचएमसी अस्पताल से थाना प्रसाद नगर पुलिस को सूचना मिली कि करीब 10 साल की एक बच्ची के साथ यौन शोषण हुआ है। पूछताछ में बच्ची ने बताया कि 10 जनवरी की दोपहर बीएल कपूर अस्पताल के पास एक ई-रिक्शा चालक ने उसे ठंड लगने की बात कहकर चाय पिलाने का लालच दिया। इसके बाद वह उसे शंकर रोड के पास पार्क और जंगल वाले इलाके में ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। बाद में आरोपी बच्ची को 100 रुपये देकर पूसा रोड रेड लाइट के पास छोड़ दिया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। मामले में बाद में डॉक्टरों की एमएलसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया।
पूरी तरह ब्लाइंड था केस
पीड़ित की उम्र कम होने के कारण वह न तो सही जगह बता पा रही थी और न ही आरोपी की पुख्ता पहचान हो पा रही थी। ऐसे में यह केस पुलिस के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया। इसके बाद एसीपी करोल बाग और SHO प्रसाद नगर के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई और जांच को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया।
घटनास्थल की पहचान और CCTV से सुराग
एक टीम ने इलाके के चार मुख्य रूट पर सघन तलाशी ली। करीब 5 घंटे की मेहनत के बाद रामनाथ विजय मार्ग पर टूटी हुई पत्थर की दीवार और पास में नीले रंग का कमरा मिला, जिसे बच्ची ने पहचान लिया। मौके से उसकी चप्पल भी बरामद हुई। दूसरी टीम ने करीब 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। आखिरकार एक कैमरे में लाल रंग का ई-रिक्शा दिखाई दिया, जिसमें बच्ची बैठी थी। यही फुटेज जांच में सबसे बड़ा सुराग साबित हुआ।
ऐसे दबोचा गया ई-रिक्शा चालक
तीसरी टीम ने ई-रिक्शा स्टैंड्स पर जांच शुरू की। राजेंद्र प्लेस के पास एक लाल ई-रिक्शा संदिग्ध हालत में खड़ा मिला। पुलिस ने वहां निगरानी रखी। कुछ देर बाद आरोपी जैसे ही मौके पर पहुंचा और पुलिस को देखा, वह भागने लगा लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया। आरोपी की पहचान दुर्गेश (25) निवासी फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। उसकी निशानदेही पर खून से सना अंडरवियर, ई-रिक्शा की पिछली सीट पर खून के निशान और वारदात में इस्तेमाल ई-रिक्शा बरामद किया गया।
जवानों की मेहनत को मिला सम्मान
इस सफल कार्रवाई के लिए कई पुलिस अधिकारियों और जवानों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन, असाधारण कार्य पुरस्कार और नकद इनाम देने की सिफारिश की गई है। दिल्ली पुलिस की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई से न सिर्फ एक खतरनाक आरोपी जेल पहुंचा, बल्कि यह भी साबित हुआ कि मुश्किल से मुश्किल मामले में भी पुलिस आम जनता को न्याय दिलाने में सक्षम है।
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