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Delhi: क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई; ग्रेटर कैलाश में जमीन हड़पने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार

दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 इलाके में सक्रिय एक संगठित भूमि धोखाधड़ी गिरोह का क्राइम ब्रांच (सदर्न रेंज) ने भंडाफोड़ किया है। आरोपी फर्जी दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रियाओं के दुरुपयोग के जरिए महंगी रिहायशी संपत्तियों, खासकर बुजुर्गों की जमीनों पर अवैध कब्जा करने की साजिश रच रहे थे। एक स्थानीय निवासी की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।

Delhi Police Busts Organized Land Fraud Racket in Greater Kailash (Symbolic Photo)

दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में संगठित भूमि धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ (सांकेतिक फोटो)

Delhi News: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (सदर्न रेंज) ने ग्रेटर कैलाश-1 क्षेत्र में सक्रिय एक संगठित भूमि कब्जा गिरोह का खुलासा किया है। यह गिरोह फर्जी कागजात तैयार कर और कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग करते हुए महंगी रिहायशी संपत्तियों पर, विशेष रूप से बुजुर्गों की जमीनों पर, अवैध कब्जा करने की योजना बनाता था। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्रेटर कैलाश के एक निवासी ने शिकायत दर्ज कराई कि एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रकाशित एक संदिग्ध सार्वजनिक नोटिस के जरिए कुछ अज्ञात लोगों ने उनकी पैतृक संपत्ति पर झूठा हक जताया है। जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता और उनका परिवार कई दशकों से उस संपत्ति पर वैध रूप से काबिज है और उनके पास रजिस्टर्ड सेल डीड व गिफ्ट डीड सहित सभी कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं। शिकायत के आधार पर ग्रेटर कैलाश थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसे आगे की विस्तृत जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। इस पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर विजय पाल दहिया को दी गई।

बुजुर्गों और कमजोर मालिकों पर निशाना

जांच में यह खुलासा हुआ कि यह गिरोह खास तौर पर बुजुर्गों और कमजोर स्थिति वाले संपत्ति मालिकों को निशाना बनाता था। आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे, जिनमें नकली रिलीज डीड, गढ़ी हुई वसीयत और जाली सेल डीड शामिल होती थीं। इन कागजों के आधार पर वे मालिकाना हक की झूठी कड़ी तैयार कर लेते और फिर अदालतों में सिविल वाद दायर कर अपने फर्जी दावों को वैध साबित करने की कोशिश करते थे। इसके लिए काल्पनिक गवाह पेश किए जाते थे, कुछ ऐसे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी और कुछ के पते गलत या नकली दर्ज किए जाते थे।

जाली दस्तावेजों के दो अलग-अलग सेट

इस मामले में आरोपियों ने ग्रेटर कैलाश स्थित शिकायतकर्ता की संपत्ति के लिए जाली दस्तावेजों के दो अलग-अलग सेट बनाए थे। इनमें फर्जी वसीयत और सेल डीड शामिल थीं, ताकि संपत्ति पर अवैध कब्जा कर उसे किसी अनजान खरीदार को बेचा जा सके। शिकायतकर्ता को इस साजिश की जानकारी तब मिली जब उनके एक रिश्तेदार ने आरोपी विनीत सहगल द्वारा दिया गया फर्जी क्लासिफाइड विज्ञापन देखा। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

तीन आरोपियों को किया गया गिरफ्तार

एसीपी वी.के.पी.एस. यादव के मार्गदर्शन में इंस्पेक्टर विजय पाल दहिया, एसआई अनुराग त्यागी, एसआई राजेश कुमार और एचसी विपिन की टीम ने मामले की गहन जांच की। 22 जनवरी 2026 को तीन आरोपियों आशीष चौधरी, विनीत कुमार सहगल और दिलीप कुमार पांडे को गिरफ्तार किया गया। यह मामला ग्रेटर कैलाश-1 थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 329(4), 62, 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के तहत दर्ज है।

धोखाधड़ी मामलों पर पुलिस की सख्ती

पुलिस हिरासत के दौरान आरोपियों से जाली मूल दस्तावेज बरामद कर जब्त किए गए। जांच में सामने आया कि गिरोह बुजुर्गों की कमजोरियों का फायदा उठाता था। आशीष चौधरी पेशे से वकील है, जबकि दिलीप पांडे का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड है और वह पहले भी कई मामलों में संलिप्त रहा है। फिलहाल पुलिस गिरोह के पूरे नेटवर्क की पहचान करने, अन्य सहयोगियों की तलाश करने और इसी तरह के अन्य मामलों की पड़ताल में जुटी है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या इसी तरीके से और संपत्तियों को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई संपत्ति से जुड़े धोखाधड़ी मामलों पर पुलिस की सख्ती को दर्शाती है और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

(इनपुट - आईएएनएस)

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 Nilesh Dwivedi
Nilesh Dwivedi author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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