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'मेरे लिए हर ब्रांड सिर्फ एक FBO', FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने डार्क किचन और अनसेफ फूड के प्रति किया आगाह

एफडीए कमिश्नर आईएएस तुकाराम मुंढे ने टाइम्स नाउ नवभारत के साथ खाद्य सुरक्षा, नियमों के उल्लंघन और मिलावटखोरी जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान, उन्होंने लोगों से अपील की कि खाना ऑर्डर करने से पहले रेस्टोरेंट के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा कर लें।

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एफडीए कमिश्नर आईएएस तुकाराम मुंढे

Photo : Times Now Digital

महाराष्ट्र में मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चला रहे एफडीए कमिश्नर आईएएस तुकाराम मुंढे ने गुरुवार को टाइम्स नाउ नवभारत से खुलकर बात की। इस दौरान, उन्होंने मुख्यत: खाद्य सुरक्षा, नियमों के उल्लंघन और मिलावटखोरी जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

तुकाराम मुंढे ने यह स्वीकार किया है कि आज के समय में खाद्य पदार्थों में मिलावट केवल एक साधारण समस्या नहीं, बल्कि एक "ऑर्गेनाइज्ड इकोनॉमी" (संगठित अर्थव्यवस्था) और एक पूरा सिस्टम बन चुका है। उन्होंने कहा कि वे इसकी जड़ पर प्रहार कर रहे हैं और दूध तथा गुटखा जैसे मामलों में संगठित अपराध कानून (Organized Crime Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNSS) की धाराओं के तहत कार्रवाई कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ''हमने दूध से जुड़ा एक रैकेट का भंडाफोड़ किया था। उसमें 13-14 लोग गिरफ्तार हुए हैं। इस मामले में बीएनएस और एफएसएसआई की धाराओं का कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं, उसको एग्जामिन कर रहे हैं।''

'खाना मंगाने से पहले जानें उसका सोर्स'

टाइम्स नाउ नवभारत के संवाददाता राकेश त्रिवेदी के साथ बातचीत में तुकाराम मुंढे ने लोगों से अपील की कि ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने से पहले रेस्टोरेंट और किचन के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा कर लें। उन्होंने "डार्क किचन" (ऐसे किचन जिनका पता स्पष्ट नहीं होता) के प्रति आगाह करते हुए कहा कि लोगों को यह चेक करना चाहिए कि खाना भेजने वाला स्टोर लाइसेंस धारक है या नहीं। तुकाराम मुंढे के मुताबिक, अगर किसी के पास लाइसेंस नहीं है, तो उसके सैनिटेशन और कच्चे माल के मानकों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

रद्द हो सकता है लाइसेंस

हाल ही में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मुंबई के मलाड स्थित ब्लिंकिट के एक स्टोर पर छापेमारी कर लाइसेंस सस्पेंड किया था। इसके बावजूद वह ऑपरेशनल था। इसको लेकर तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे लोगों का लाइसेंस रद्द हो सकता है और कार्रवाई भी हो सकती है।

उन्होंने कहा, ''मैंने अपने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सस्पेंशन के बाद दोबारा जांच करें कि आउटलेट काम तो नहीं कर रहा, और सबूत के लिए वीडियो भी बनाएं। हमें एक-दो बार ऐसे केस मिले हैं।''

'हर ब्रांड मेरे लिए एक FBO है'

'क्या किसी बड़े ब्रांड या दबाव के आगे आप झुक सकते हैं?' जब एफडीए कमिश्नर से यह सवाल पूछा गया तो उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए कहा, ''कार्रवाई इस आधार पर नहीं होती कि ब्रांड की प्रतिष्ठा या राजनीतिक पहुंच कितनी है, बल्कि इस आधार पर होती है कि वह नियमों और खाद्य मानकों का पालन कर रहा है या नहीं।'' इस दौरान उन्होंने एक बात स्पष्ट की कि उनके लिए कोई भी ब्रांड छोटा या बड़ा नहीं है, बल्कि हर कोई केवल एक फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) है।
Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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