नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 'एम/एस डिजिटल विजन' नाम की दवा कंपनी को निशाने पर लिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह कंपनी नशे के कारोबार से जुड़ी एक बड़ी कड़ी थी, जो अंतरराज्यीय स्तर पर मादक पदार्थों की अवैध सप्लाई कर रही थी।
सिर्फ कागजों पर मौजूद थीं दोनों फर्म
NCB के मुताबिक, डिजिटल विजन ने ट्रामाडोल कैप्सूल और कोडीन फॉस्फेट युक्त खांसी की दवा (कफ सिरप) की भारी मात्रा में सप्लाई जोधपुर और देहरादून की दो फर्जी फर्मों को की थी। खास बात यह है कि ये फर्में सिर्फ कागजों पर मौजूद थीं, लेकिन हकीकत में इनका कोई अस्तित्व नहीं था। जांच में सामने आए बिल, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज बताते हैं कि पिछले एक साल छह महीने में कंपनी ने 48 लाख से ज्यादा ट्रामाडोल कैप्सूल और करीब 12,000 बोतल कफ सिरप सप्लाई किए। इन सौदों का भुगतान उस व्यक्ति से जुड़ा मिला, जिसे पहले ही इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
अवैध रूप से नशीली दवाओं की सप्लाई
NCB ने यह भी पाया कि डिजिटल विजन ने अपना MD-VI सर्टिफिकेट रद्द हो जाने के बाद भी उत्पादन और भंडारण का काम जारी रखा। यानी, नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कंपनी अवैध रूप से नशीली दवाओं की सप्लाई में लगी रही। अधिकारियों का कहना है कि अब तक मिली जानकारियों से साफ है कि डिजिटल विजन इस पूरे नेटवर्क की केंद्रीय भूमिका निभा रही थी। सूत्रों का कहना है कि इस कंपनी की दवाई पीने से 2020 मे जम्मू में दर्जनों बच्चो की मौत भी हो गई थी। यह कंपनी सिर्फ दवाएं नहीं बना रही थी, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से नशे के कारोबार की जड़ में शामिल थी।
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