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Delhi News: खुशखबरी... दिल्ली की तीन अवैध कॉलोनी होंगी वैध, जानें एमसीडी किसे देने जा रही राहत

दिल्ली नगर निगम ने तीन अवैध कॉलोनियों ईस्ट आजाद नगर, स्वरूप नगर और खिड़की एक्सटेंशन को वैध करने के लिए चुना है। इन कॉलोनियों पर साल 2026 तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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फाइल फोटो

Photo : BCCL

दिल्ली: राजधानी की तीन अवैध कॉलोनियों में रहने वालों के लिए राहत भरी खबर है। अब दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी अपने मास्टर प्लान के तहत जल्द ही इन अनाधिकृत कॉलोनियों को वैध बनाने का बड़ा प्लान तैयार किया है। इसके लिए एमसीडी एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के लिए तीन कॉलोनियों ईस्ट आजाद नगर, स्वरूप नगर और खिड़की एक्सटेंशन को नियमित करने के लिए चुना गया है। इतना ही नहीं एमसीडी ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के सहयोग से इन इलाकों के लिए पहले ही सड़क नेटवर्क योजना तैयार कर ली है।

2026 तक सुरक्षा प्रदान

दरअसल, सरकार ने संसद में दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों को अगले तीन सालों में यानी दिसंबर 2026 तक सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक विधेयक पारित किया था। नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य इन अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले अनगिनत लोगों को बड़ी राहत देना है। साथ ही इस कानून के तहत अवैध कॉलोनियों में सीलिंग और बुलडोजर एक्शन जैसी कार्रवाइयों पर रोक लगेगी।

होंगी ये व्यवस्थाएं

इन इलाकों में MPD के कार्यान्वयन के लिए एमसीडी का लक्ष्य इमरजेंसी वाहनों जैसे दमकल गाड़ियों को निकालने के लिए अंदर के रास्तों को चौड़ा करना है। इसमें कुछ घरों और दुकानों को गिराया जा सकता है। उन्हें पहले ही हटाने के लिए चिह्नित किया जा चुका है। इन कॉलोनियों के भीतर प्रस्तावित सड़कें क्रमश 12 और 9 मीटर तक चौड़ी की जाएंगी। इतनी ही नहीं कॉलोनियों को नियमित करने के अलावा, पायलट प्रोजेक्ट में सरकारी भवनों जैसे स्कूल, एक पुलिस स्टेशन, एक दिल्ली जल बोर्ड कार्यालय और एक स्टेडियम का निर्माण भी शामिल है।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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