गुरु तेग बहादुर को समर्पित है ये मेमोरियल (Photo - Delhi Tourism)
मुख्य बातें
आज यानी 24 नवंबर 2025 को गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस है। इस अवसर पर गुरु तेग बहादुर की बहादुरी, उनके त्याग और धर्म-परायणता को याद किया जा रहा है। विशेषतौर पर दिल्ली और आनंदपुर साहिब के शीश गंज गुरुद्वारा, दिल्ली के रकाब गंज गुरुद्वारा पहुंचकर लोगों ने गुरु तेग बहादुर को याद किया। अगर आप गुरु तेग बहादुर को श्रद्धांजलि देना चाहते हैं या उनके बारे में और जानना चाहते हैं तो दिल्ली में आपके पास एक विशेष स्थान और है। यह स्थान है गुरु तेग बहादुर मेमोरियल। सिख पंथ के नौवें गुरु को समर्पित यह स्मारक सिर्फ इतिहास का हिस्सा ही नहीं, बल्कि राजधानी दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान भी है।
गुरु तेग बहादुर मेमोरियल का निर्माण कार्य साल 2011 में पूरा हुआ और उसी साल इसे आम जनता के लिए खोल भी दिया गया। यह मेमोरियल लगभग 11.87 एकड़ में फैला है। इस विशाल परिसर को बनाने में उस समय लगभग 26 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। दिल्ली सरकार द्वारा निर्मित इस साइट की देखरेख आज दिल्ली पर्यटन विभाग करता है। गुरु तेग बहादुर को हिंद की चादर कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने औरंगजेब के अत्याचारों के खिलाफ हिंदुओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। यह मेमोरियल आज उनकी महान शहादत का प्रतीक है।
गुरु तेग बहादुर मेमोरियल दिल्ली में सिंघू बॉर्डर पर जीटी करनाल रोड (NH-1) के किनारे बना है। एक समय दिल्ली सरकार ने राजधानी के सभी प्रमुख एंट्री प्वाइंट्स को खास पहचान देने की योजना बनाई थी। इसी कड़ी में सिंघू बॉर्डर पर यह स्मारक बनाया गया था। दिल्ली आने वाले हजारों यात्री इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन बहुत कम लोग इस स्मारक के महत्व को समझते हैं।
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लगभग 12 एकड़ में फैला गुरु तेग बहादुर मेमोरियल परिसर वास्तुकला के शानदार मिश्रण से बना है। यहां पहुंचने पर सबसे पहले नजर पड़ती है यहां के 24 मीटर ऊंची केंद्रीय संरचना पर जो गुरु तेग बहादुर की शक्ति और बलिदान का प्रतीक है। इसके आसपास अंग्रेजी अक्षर ‘C’ के आकार में बने तीन आर्च उनके तीन प्रमुख अनुयायियों भाई मति दास, भाई दयाल दास और भाई सती दास को दर्शाते हैं। इन तीनों को भी औरंगजेब ने बड़ी बेरहमी से शहीद किया था। भाई मति दास के दो टुकड़े में चीर दिया गया था, भाई दयाल दास को खौलते पानी में डालकर मौत के घाट उतारा गया, जबकि भाई दयाल दास के शरीर को कई टुकड़ों में काट दिया था।
मेमोरियल में सेंट्रल स्ट्रक्चर के पास 10 मोनोलिथ खड़े हैं, जो सिख परंपरा के दस गुरुओं का प्रतीक हैं - दोनों ओर 5-5 मोनोलिथ हैं। यहां पहले शाम को विशेष लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित होता था, जिसकी थीम पंचतत्व—ध्वनि, अग्नि, हवा, जल और पृथ्वी - पर आधारित रहती थी।
स्मारक के परिसर में बड़ा और बहुत ही खूबसूरत हरा-भरा लॉन है, जहां लोग अक्सर पिकनिक मनाने आते हैं। यहां लगभग 100 लोगों की क्षमता वाला एक मीटिंग रूम भी मौजूद है। साथ ही पर्यटकों के लिए कॉफी हाउस है, जहां बैठकर लोग गर्मागर्म कॉफी का आनंद लेते हैं। जन्मदिन, एनिवर्सरी और धार्मिक आयोजनों के लिए भी यह स्थान विशेष रूप से पसंद किया जाता है।
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यह मेमोरियल साल 2011 में बनाया गया और उसी वर्ष आम जनता के लिए खोला गया।
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