दिल्ली

शराब घोटाला मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और संजय सिंह का क्या होगा? अदालत ने ईडी को दिया ये निर्देश

कथित शराब घोटाला मामले को लेकर अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिया है। दिल्ली की अदालत ने ईडी को आरोपियों को कागजात मुहैया कराने का निर्देश दिया है। इस मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह भी आरोपी है। आपको बताते हैं कि कोर्ट ने क्या कुछ कहा।

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अदालत ने ईडी को आरोपियों को कागजात मुहैया कराने का निर्देश दिया।

Delhi Excise Policy Case: दिल्ली की आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह का क्या होगा? हाल ही में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में पहले ही केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को झटका लगा है। अब दिल्ली की एक अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कथित आबकारी घोटाले से संबंधित दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य के खिलाफ धन शोधन के एक मामले में आरोपी व्यक्तियों को कुछ दस्तावेज सौंपने का निर्देश दिया है।

ईडी को आरोपियों को कागजात मुहैया कराने का निर्देश

विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने 25 फरवरी को कई आरोपियों द्वारा दायर आवेदनों पर यह आदेश दिया। आरोपियों ने अपने आवेदनों में दावा किया था कि उन्हें मामले में दायर आरोपपत्र से संबंधित कुछ दस्तावेज नहीं मिले हैं। अदालत वर्तमान में दस्तावेजों की जांच कर रही है। अदालत ने मामले में सुनवाई के लिए तीन मार्च की तारीख तय की। इस मामले में आम आदमी पार्टी (आप) नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह भी आरोपी हैं।

अदालत ने आगे की कार्यवाही को लेकर क्या कुछ कहा?

न्यायाधीश ने कहा, 'अगली सुनवाई की तारीख यानी तीन मार्च को आगे की कार्यवाही के लिए प्रस्तुत करें।' धन शोधन का मामला दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना द्वारा आबकारी नीति के कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं की जांच की सिफारिश करने के बाद दर्ज किए गए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के एक मामले से सामने आया है।

सीबीआई और ईडी के अनुसार, नीति को संशोधित करते समय अनियमितताएं की गईं और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर, 2021 को नीति लागू की और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने पर सितंबर 2022 के अंत तक इसे रद्द कर दिया।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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