दिल्ली

वक्फ बोर्ड से मस्जिद के इमामों को नहीं मिल रही सैलरी, कई महीनों से रुकी पेमेंट ने किया परेशान

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  • Updated Aug 15, 2024, 11:36 AM IST

Masjid Imam Salary: दिल्ली वक्फ बोर्ड की मस्जिदों के इमामों और मुअज्जिनों को पिछले दो सालों सैलरी नहीं मिली है। वक्फ इमाम कारी ग्यासुर हसन ने कहा कि वे करीब 8 साल से अपने वेतन को लेकर परेशान हैं

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इमामों को नहीं मिली कई महीने से सैलरी

Photo : ANI

Masjid Imam Salary: वक्फ बोर्ड के अंतर्गत दिल्ली की मस्जिदों में इमाम और मुअज्जिनों का वेतन पिछले एक-दो सालों से रुका हुआ है। हालांकि उप राज्यपाल के हस्तक्षेप के बाद 5-5 महीने की किश्त जारी की गई थी। जिससे इमामों का वेतन दिया गया था। लेकिन अभी भी कई इमामों की केवल दो ही किस्तें मिली है। वहीं कुछ इमामों की सैलरी रुकी हुई है। जिससे वजह से इन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक वक्फ इमाम ने बताया कि दिल्ली में करीब 185 इमाम हैं जिनका वेतन रुका हुआ है।

8 साल से वेतन को लेकर परेशान

वक्फ इमाम कारी ग्यासुर हसन ने कहा कि हम करीब 8 साल से अपने वेतन को लेकर बेहद परेशान हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जब से आम आदमी पार्टी की सरकार आई है और अमानतुल्लाह खान चेयरमैन बने हैं, तब से हमें परेशानी हो रही है। हमारा वेतन कभी समय पर नहीं आया। उन्होंने बताया कि वे सीओ से भी मिल चुके है और अरविंद केजरीवाल के आवास पर भी गए, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पाई। जिसके बाद वे आतिशी से भी मिलने गए, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। इमाम ने कहा कि जिस तरह से हमारा 20-25 महीने का वेतन रुका हुआ है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।

इमाम गाजीउद्दीन को 30 महीने से वेतन नहीं मिला

दिल्ली में एंग्लो अरेबिक स्कूल के इमाम गाजीउद्दीन मुफ्ती मोहम्मद कासिम ने बताया कि यह मामला काफी समय से चल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ इमाम ऐसे हैं जिन्हें करीब 30 महीने से वेतन नहीं मिला है। वहीं कुछ इमामों को पिछले 15-16 महीने से तनख्वाह नहीं मिली। गाजीउद्दीन ने कहा कि असल मुद्दा यह है कि वक्फ बोर्ड में मस्जिद सेक्शन ने उच्च अधिकारियों को गुमराह किया है और गलत रिपोर्ट दी है, जिसके कारण वक्फ बोर्डइमामों को अवैध कहता है। मैं यह समझने में असमर्थ हूं कि वक्फ बोर्ड किस तरह से इमामों को अवैध कह रहा है।

सरकार द्वारा अनुदान मिलने पर भी इमामों को वेतन नहीं

इमाम गाजीउद्दीन ने कहा कि अब जब सरकार बड़ा अनुदान दे रही है, इसके बावजूद इमामों को 15-30 महीने से वेतन नहीं मिल रहा है, जबकि बोर्ड ने सभी इमामों को अनुदान पर रखा है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। कहा जाता है कि पिछले चेयरमैन अमानतुल्लाह खान ने कुछ लोगों को अवैध तरीके से नियुक्त किया है, जबकि आरटीआई के जवाब में यही बोर्ड खुद कोर्ट में कह रहा है कि चेयरमैन को ईमान और मौलाना की नियुक्ति का अधिकार है।

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