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Delhi Power Cut: दिल्ली में बिजली कटौती का क्या है सच? BSES ने बताया कहां हुई गड़बड़ी

Delhi Power Cut: राजधानी दिल्ली में बिजली कटौती की खबरों को BSES ने निराधार और भ्रामक बताया है। कहा बिजली वितरण प्रणाली की प्रकृति के कारण स्थानीय स्तर पर मामूली गड़बड़ियां हो सकती हैं, लेकिन बीएसईएस की टीमें जल्द से जल्द समस्या का समाधान करती हैं।

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(सांकेतिक फोटो)

Delhi Power Cut: दिल्ली में बढ़ती गर्मी के बीच बिजली कटौती को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। लोगों का आरोप है कि राजधानी में मनमानी बिजली कटौती की जा रही है, जिससे दिन के साथ रात्रि में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हालाकि, इन आरोपों पर कितनी सच्चाई है, इस पर BSES ने सफाई पेश की है। BSES ने सोशल मीडिया पर लग रहे बिजली कटौती के आरोपों को भ्रामक और गलत बताया है। कहना है कि किसी प्रकार की पॉवर कटौती नहीं की गई, जो लोग ऐसे प्रोपेगेंडा चला रहे हैं वो पूरी तरह से गलत है।

बिजली की बढ़ी मांग

इस वर्ष गर्मी के सीजन के दौरान दिल्ली में बिजली मांग 9000 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है। 2024 में बिजली मांग 8656 मेगावाट, जबकि 2023 में पहली बार 8000 मेगावाट पार हुई थी। BRPL और BYPL के जरिए 50 लाख से अधिक उपभोक्ताओं और 2 करोड़ से ज्यादा लोगों को बिजली आपूर्ति की गई। माना जा रहा है कि बिजली वितरण प्रणाली की प्रकृति के कारण स्थानीय स्तर पर मामूली गड़बड़ियां हो सकती हैं। बीएसईएस की टीमें जल्द से जल्द समस्या का समाधान करती हैं।

मेंटेनेंस और बिजली कटौती

निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मेंटेनेंस कार्य किए जाते हैं। इस कारण कुछ क्षेत्रों में अस्थायी बिजली कटौती हो सकती है। लेकिन, किसी प्रकार से व्यापक तौर पर कटौती नहीं की गई। उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की समस्या न हो इसके लिए बिजली आपूर्ति की निगरानी के लिए विशेष वॉर रूम बनाए गए हैं। किसी भी समस्या को हल करने के लिए फील्ड टीमें हाई अलर्ट पर हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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