Online Hotel Booking Scam: दिल्ली के साउथ-ईस्ट जिले की साइबर पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी देशभर में नकली होटल बुकिंग वेबसाइट्स बनाकर लोगों से लाखों रुपये की धोखाधड़ी कर रहे थे। जांच के दौरान पुलिस को अब तक 100 से अधिक फर्जी वेबसाइट्स और 132 से ज्यादा शिकायतें मिली हैं, जिनमें कुल मिलाकर लगभग एक करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है।
मामला तब सामने आया जब शशांक रायजादा नामक व्यक्ति ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई कि उनसे जे.डब्ल्यू. मैरियट, चंडीगढ़ के नाम पर ₹68,000 की ठगी की गई है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की और इस साइबर रैकेट का खुलासा किया। डीसीपी साउथ-ईस्ट डॉ. हेमंत तिवारी के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में फैले नेटवर्क पर 144 घंटे तक लगातार ऑपरेशन चलाया।
इस तरह से हुई गिरफ्तारी
तकनीकी निगरानी और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर टीम ने राजस्थान के दीग जिले के झेंझपुरी गांव में छापा मारा। यहां से तीन आरोपियों शरूप, एकरार और सोहेल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके पास से कई मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए। जांच के दौरान पता चला कि ठगों ने “Adsline” नाम की एक डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी के माध्यम से ये सभी फर्जी वेबसाइट्स तैयार करवाई थीं। पुलिस ने इस मामले में डिजिटल एजेंसी “Adsline” के मालिक गोपाल सिंह कार्की को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया। उसके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और महत्वपूर्ण डेटा बरामद हुआ।
इन होटलों में बनाते थे फर्जी वेबसाइट्स
जांच में सामने आया कि ठगों का modus operandi बेहद सुनियोजित था। आरोपी JW Marriott, Taj, Radisson Blu जैसे नामी होटलों के नाम पर फर्जी वेबसाइट्स बनाते थे। जब कोई व्यक्ति गूगल पर होटल बुकिंग की खोज करता, तो ये नकली वेबसाइट्स पेड विज्ञापनों के जरिए सर्च रिजल्ट में ऊपर दिखाई देती थीं। वहां दिए गए संपर्क नंबर पर कॉल करने पर आरोपी खुद को होटल रिसेप्शनिस्ट बताकर ग्राहकों को 10 से 20 प्रतिशत तक की छूट का लालच देते थे। जैसे ही लोग ऑनलाइन भुगतान करते, ठग तुरंत संपर्क तोड़कर गायब हो जाते।
अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर होती थी रकम
ठगी से हासिल किए गए पैसों का इस्तेमाल आरोपी सोना, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने में करते थे, जिन्हें बाद में विभिन्न शहरों में बेच दिया जाता था। पूछताछ में एजेंसी मालिक गोपाल सिंह कार्की ने स्वीकार किया कि वह डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर इन आरोपियों के लिए वेबसाइट तैयार करता था और गूगल ऐड्स चलाने में सहयोग देता था। ठगी से मिली रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी और फिर उसे खर्च कर दिया जाता था।
ये चीजें हुईं बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन, एक एप्पल लैपटॉप, 100 से अधिक फर्जी होटल वेबसाइट्स का डेटा और ₹68,000 की ठगी से खरीदे गए गहनों व गैजेट्स से जुड़ी जानकारी बरामद की है। गिरफ्तार आरोपियों में शरूप (26) शामिल है, जो कॉल करने और फर्जी सिम कार्ड की व्यवस्था करता था तथा पहले भी एक मामले में लिप्त रह चुका है। सोहेल (24) ठगी के बाद खरीदे गए सामान को इकट्ठा कर बेचने का काम करता था। एकरार (27) इस पूरे नेटवर्क का मुख्य साजिशकर्ता था, जो वेबसाइट बनवाने और वित्तीय लेन-देन संभालता था। वहीं, गोपाल सिंह कार्की (32) “Adsline” एजेंसी का संचालक था, जो फर्जी वेबसाइट बनाकर उनके विज्ञापन चलाने का कार्य करता था।
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