Air Pollution Mitigation Plan 2025: दिल्ली में प्रदूषण की समस्या और उससे निपटने की सरकारी कवायद दोनों सालों पुराने हैं। ऑड-ईवन से लेकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर सब्सिडी देने तक की सारी कोशिशों के केंद्र में प्रदूषण ही रहता है। इसी कड़ी में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को वायु प्रदूषण शमन योजना 2025 (Air Pollution Mitigation Plan 2025) की शुरुआत की। इसके तहत सरकार की ओर से कई प्रकार तरह की कोशिशें की जाएंगी जिससे प्रदूषण को कम किया जा सके।
सरकार ने पेश किया खाका
इस प्लान के तहत राष्ट्रीय राजधानी में मेट्रो स्टेशन पर 2,300 इलेक्ट्रिक ऑटो तैनात किए जाएंगे, वायु प्रदूषण के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील 13 इलाकों में 'मिस्ट स्प्रेयर' लगाए जाएंगे और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण (PUCC) पत्र केंद्रों का हर छह महीने में ऑडिट किया जाएगा। 'शुद्ध हवा सबका अधिकार-प्रदूषण पर जोरदार प्रहार' नाम की व्यापक प्रदूषण-रोधी कार्य योजना में हरित पहल (Green initiatives), इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल में वृद्धि, यातायात सुधार और सांइटिफिक इनोवेशन के जरिए राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के स्तर पर लगाम लगाने का खाका पेश किया गया है।
लगाए जाएंगे पेड़
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली उनकी सरकार का सपना है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। योजना की शुरुआत के बाद मीडिया से मुखातिब CM ने एक सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि पिछली सरकार की ऑड ईवन नीति लागू नहीं की जाएगी, क्योंकि इससे लोगों को असुविधा हुई थी।
उन्होंने कहा, "अगर किसी परिवार के पास केवल एक ही वाहन हो, तो ऐसे में क्या होगा? हमें दिल्ली के नागरिकों की आवश्यकताओं और वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए।" गुप्ता ने बताया कि योजना के हिस्से के रूप में सरकार 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत 70 लाख पौधे लगाएगी और इसकी शुरुआत पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर की जाएगी।'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी, जो माताओं के प्रति सम्मान को पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के साथ जोड़ने वाली एक अनूठी पहल है।
EoL गाड़ियों पर सख्ती
गुप्ता ने कहा कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए PUCC जारी करने वाले केंद्रों का हर छह महीने में ऑडिट किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शहर में यातायात जाम की समस्या पर काबू पाने के लिए सरकार ‘स्मार्ट इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम’ पेश करेगी। सरकार दिल्ली में प्रवेश करने वाले एंड ऑफ लाइफ (EoL) वाहनों की पहचान करने के लिए सभी बॉर्डर पॉइंट पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाने की भी योजना बना रही है। EoL वाहन उन वाहनों को कहते हैं जो अब सड़क पर चलने लायक या कानूनी रूप से पंजीकृत नहीं हैं, उनकी आयु खत्म हो चुकी है।
गुप्ता ने बताया कि पड़ोसी राज्यों में पंजीकृत EoL वाहनों के मालिकों को SMS अलर्ट भेजकर राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश न करने की चेतावनी दी जाएगी। इन प्रतिबंधों का प्रचार करने के लिए प्रवेश बिंदुओं पर बिलबोर्ड लगाए जाएंगे।
EV पर बढ़ेगा जोर
योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली मेट्रो की ओर से विभिन्न स्टेशन पर 2,299 इलेक्ट्रिक ऑटो तैनात किए जाएंगे, जो दूरदराज के इलाकों तक परिवहन सेवा उपलब्ध कराएंगे। सरकार ने पूरे शहर में मॉल, हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और नगर निगम एवं प्राइवेट संस्थाओं के कॉमर्शियल और बाकी जगहों पर 18,000 सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने की भी घोषणा की। सरकार के मुताबिक, दिल्ली में मौजूदा EV बुनियादी ढांचे का ऑडिट किया जाएगा और इसे उन्नत एवं विस्तारित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
इस योजना का मकसद 80 फीसदी सरकारी वाहनों को स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों से बदलना और इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाने के लिए नयी EV नीति लागू करना भी है। वन और संरक्षित क्षेत्रों में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल की इजाजत होगी तथा गैर-इलेक्ट्रिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटा दिया जाएगा।
धूल में कमी की भी होगी कोशिश
कार्य योजना में वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए धूल के स्तर में कमी लाने को प्राथमिकता दी गई है। इसमें कहा गया है कि सरकार मानसून को छोड़कर बाकी अवधि में पूरी दिल्ली में पानी का छिड़काव करने वाले एक हजार 'वाटर स्प्रिंकलर' और 140 'एंटी-स्मॉग गन' तैनात करेगी। प्लान के अनुसार, इन उपायों की GPS, कैमरे, सेंसर और डैशबोर्ड जैसी तकनीकों से रीयल समय में निगरानी की जाएगी। योजना के मुताबिक, पहले चरण में चिह्नित उन 13 इलाकों में सड़क के किनारे बिजली के खंभों और इसी तरह की अन्य संरचनाओं पर 'मिस्ट स्प्रेयर' लगाए जाएंगे, जो वायु प्रदूषण के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। योजना में 200 मशीनीकृत सड़क सफाई मशीनों, 20 डंप वाहनों, कूड़ा उठाने वाली 70 इलेक्ट्रिक मशीनों और पानी के 38 टैंकर की तैनाती भी शामिल है।
योजना में सभी सड़कों का मानचित्रण एवं मरम्मत, सड़कों के किनारे वृक्षारोपण और पक्की सड़कों का निर्माण शामिल है। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार धूल को कम करने में ‘क्लाउड सीडिंग’ (कृत्रिम बारिश की तकनीक) की प्रभावशीलता आंकने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के साथ साझेदारी में इस तकनीक पर एक पायलट परियोजना शुरू करेगी। इस पहल को 'ऐतिहासिक कदम' करार देते हुए गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में पहली बार इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
लगाए जाएंगे एंटी-स्मॉग गन
योजना के तहत मॉल और होटल सहित 3,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली सभी ऊंची व्यावसायिक इमारतों के लिए अपनी छतों पर ‘एंटी-स्मॉग गन’ लगाना अनिवार्य होगा, जो मानसून को छोड़कर पूरे साल चालू रहेंगी। योजना के अनुसार, सड़कों की स्थिति सुधारने और धूल के स्तर में और कमी लाने के लिए सरकार पूरे शहर में सड़कों की स्थिति का आकलन करने के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण कराएगी।
कचरों का होगा समाधान
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के मुद्दे पर योजना में चरणबद्ध तरीके से पुराने कचरे के जैव-खनन (Biomining) की रूपरेखा दी गई है। सरकार ने ओखला लैंडफिल साइट पर मार्च 2027 तक, भलस्वा लैंडफिल साइट पर दिसंबर 2027 तक और गाजीपुर लैंडफिल साइट पर सितंबर 2028 तक कचरे का पूरी तरह से निपटान करने का लक्ष्य रखा है। ओखला में मौजूदा कचरे से एनर्जी प्लांट को इसकी वर्तमान क्षमता 1,950 टन प्रति दिन से बढ़ाकर मार्च 2027 तक 2,950 टन प्रति दिन किया जाएगा। नवंबर 2028 तक नरेला-बवाना में 3,000 टन प्रति दिन क्षमता वाला एक नया कचरे से एनर्जी प्लांट स्थापित किया जाएगा। वायु गुणवत्ता पर नजर रखने और औद्योगिक अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए, मौजूदा वायु निगरानी नेटवर्क में छह नए केंद्र जोड़े जाएंगे और एक नई औद्योगिक नीति शुरू की जाएगी। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक कचरे को स्थायी रूप से रखने के लिए ई-वेस्ट इको पार्क का निर्माण किया जाएगा।
(इनपुट-भाषा)
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