दिल्ली

Delhi: Bhajanpura चौक से सुबह-सुबह हटाए गए मंदिर और मजार, PWD के अभियान के बीच भारी पुलिस बल तैनात

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 2, 2023, 09:03 AM IST

Bhajanpura: डीसीपी नॉर्थईस्ट जॉय एन टिर्की ने बताया, भजनपुरा चौक पर अतिक्रमण अभियान शांतिपूर्वक चल रहा है। दिल्ली की धार्मिक समिति द्वारा सहारनपुर राजमार्ग के लिए सड़क को और चौड़ा करने के लिए एक हनुमान मंदिर और एक मजार को हटाने का निर्णय लिया गया था।

Bhajanpura: दिल्ली के भजनपुरा में रविवार सुबह-सुबह बड़ी कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। इस दौरान भारी सुरक्षा के बीच चौक के बीच में बनी मजार और मंदिर को हटा दिया गया। इसके लिए भारी संख्याा में पुलिसबल तैनात किया गया था। मजार के कारण अक्सर जाम लगता रहता था। इसे हटाने के लिए लंबे समय से बातचीत चल रही थी। जानकारी के मुताबिक, भजनपुरा चौक पर यह मजार करीब तीन दशक से भी ज्यादा पुरानी थी।

डीसीपी नॉर्थईस्ट जॉय एन टिर्की ने बताया, भजनपुरा चौक पर अतिक्रमण अभियान शांतिपूर्वक चल रहा है। दिल्ली की धार्मिक समिति द्वारा सहारनपुर राजमार्ग के लिए सड़क को और चौड़ा करने के लिए एक हनुमान मंदिर और एक मजार को हटाने का निर्णय लिया गया था। दोनों ढांचों को शांतिपूर्वक हटा दिया गया है।

ड्रोन से की गई निगरानी

भजनपुरा स्थित मजार और मंदिर को हटाने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से कार्रवाई की गई। इस दौरान पुलिस बल के अलावा केंद्रीय बलों को भी तैनात किया गया था। इसके अलावा किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए विशेष तैनाती की गई थी। ड्रोन से लगातार पूरे इलाके की निगरानी की जा रही थी। अतिक्रमण अभियान के दौरान पुलिस लोगों से शांति बनाए रखने की भी अपील करती नजर आई। बता दें, इस मजार को हटाने के लिए पहले भी कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

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प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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