Delhi News: दिल्ली पुलिस की आउटर नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट टीम ने कुख्यात गोगी गैंग/सोनू खर्खड़ी गिरोह से जुड़े तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से एक सेमी-ऑटोमेटिक पिस्टल (Pietro Gardone VTCAL PAT मेक), एक देसी कट्टा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ऋतिक उर्फ बम (22) और चंदन (19), दोनों निवासी कपाशेरा, दिल्ली के रूप में हुई है। इनके अलावा रोहित की भी गिरफ्तारी हुई है। बता दें कि ऋतिक को थाना कपाशेरा का बीसी (Bad Character) घोषित किया गया है और उस पर छह गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, चंदन दो लूट और हथियारों के मामलों में पहले भी जेल जा चुका है।
पुलिस की चौकसी से पकड़े गए बदमाश
घटना 2 अक्टूबर की है, जब थाना समयपुर बादली की पेट्रोलिंग टीम — जिसमें कॉन्स्टेबल विकास, अश्विनी और विजय शामिल थे — बीजी ब्लॉक, संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में गश्त कर रही थी। उसी दौरान एक सफेद i20 कार (PB91N0207) बिना आगे की नंबर प्लेट के आती दिखी। पुलिस ने रुकने का इशारा किया तो कार में सवार युवक वहां से भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर कार को रोक लिया। कार में उस दौरान छह लोग सवार थे, जिनमें से तीन भाग निकले और तीन को मौके पर गिरफ्तार किया। तलाशी में ऋतिक और चंदन के पास से अवैध हथियार मिले।
पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
ऋतिक उर्फ बम, पहले राजेश भारती के “क्रांति गैंग” से जुड़ा रहा है। राजेश भारती 2018 में स्पेशल सेल के एनकाउंटर में मारा गया था। उसके बाद ऋतिक ने गोगी और सोनू खर्खड़ी गिरोह के लिए काम करना शुरू किया। ये गिरोह दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में रंगदारी और धमकी जैसे अपराधों में सक्रिय है।
चंदन, ऋतिक का सहयोगी है और उसे लॉजिस्टिक सपोर्ट देता था।
पाकिस्तान से जुड़ा साइबर फाइनेंशियल नेटवर्क
पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ — ऋतिक पिछले कुछ महीनों से क्रिप्टो करेंसी (USDT) के जरिये पाकिस्तान से चल रहे फाइनेंशियल रैकेट से जुड़ा था। वह पाकिस्तानी व्हाट्सऐप नंबरों के जरिए विदेशी हैंडलर्स से बात करता था। वह भारतीय क्रिप्टो ट्रेडर्स के UPI IDs लेकर पाकिस्तानी स्कैमर्स को देता था। ये स्कैमर्स फेक लोन ऐप्स के जरिए भारतीय पीड़ितों से पैसे वसूलते थे और वही पैसा ऋतिक के दिए UPI IDs में ट्रांसफर कराते थे।
इसके बदले ऋतिक उन्हें USDT क्रिप्टो करेंसी भेजता था और हर ट्रांजेक्शन पर 5% कमीशन कमाता था। पुलिस जांच में पाया गया कि जिन UPI IDs में पैसा जा रहा था, वे उन्हीं लोगों से जुड़ी थीं जो फर्जी लोन ऐप्स से ठगे गए थे। यह नेटवर्क दक्षिण एशिया के देशों से चलाया जा रहा था, जहां से भारतीय नागरिकों को ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठे जाते हैं।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
गिरफ्तार दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर 5 दिन की पुलिस रिमांड ली गई है। रिमांड के दौरान कपाशेरा और आस-पास के इलाकों में कई जगह छापेमारी की गई। तीसरा आरोपी सुरज उर्फ ऋतिक (निवासी कपाशेरा), जो हथियार उपलब्ध कराता था, फिलहाल फरार है। उसकी तलाश में पुलिस की टीम लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी से न केवल गोगी गिरोह के अपराधियों की गतिविधियों पर अंकुश लगेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है। आगे की जांच में और भी लोगों के जुड़ने की संभावना है।
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