दिल्ली

कपिल मिश्रा के इस्तीफे की मांग क्यों कर रहे विपक्षी नेता? प्रदर्शन कर रहे AAP के 12 विधायक निलंबित

कपिल मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे आम आदमी पार्टी (AAP) के 12 विधायकों को विधानसभा से निलंबित कर दिया गया है। इन विधायकों में आतिशी भी शामिल हैं। सदन में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर मिश्रा को बचाने का आरोप लगाया।

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कपिल मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे 'आप' विधायक विधानसभा से निलंबित।

Delhi Politics: दिल्ली की नवगठित आठवीं विधानसभा के पहले बजट सत्र के अंतिम दिन कानून एवं न्याय मंत्री कपिल मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप)के 12 विधायकों को निलंबित कर दिया गया। दिल्ली की अदालत ने मंगलवार को 2020 के दिल्ली दंगों में मिश्रा की कथित भूमिका को लेकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था, जिसके एक दिन बाद ‘आप’ विधायकों ने प्रदर्शन किया।

किन 12 विधायकों को विधानसभा से किया गया निलंबित?

आप विधायक तख्तियां लेकर और नारे लगाते हुए सदन में विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने आए गए, जिसके बाद अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 12 विपक्षी विधायकों- आतिशी, कुलदीप कुमार, संजीव झा, मुकेश अहलावत, सुरेंद्र कुमार, जरनैल सिंह, आले मोहम्मद इकबाल, अनिल झा, विशेष रवि, सोम दत्त, सही राम और प्रेम चौहान को निलंबित कर दिया।

सदन में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर मिश्रा को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने से कहा, 'दंगों के सभी आरोपी जेल में हैं। कपिल मिश्रा सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं? हम उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, लेकिन भाजपा उन्हें बचा रही है।'

कपिल मिश्रा के खिलाफ अदालत ने दिया है ये आदेश

‘आप’ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा, ' दिल्ली के दंगों में 53 लोगों की मौत के जिम्मेदार कपिल मिश्रा के खिलाफ अदालत ने प्राथमिकी का आदेश दिया है। लेकिन दिल्ली पुलिस और भाजपा सरकार कपिल मिश्रा को बचाने का काम कर रही है और मुख्यमंत्री कपिल मिश्रा से इस्तीफा नहीं ले रहीं।'

विधानसभा अध्यक्ष गुप्ता ने विधानसभा सचिव को यह सत्यापित करने का निर्देश दिया कि क्या निलंबित विधायक परिसर में ही हैं और क्या निलंबन आदेश के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। आठवीं विधानसभा के प्रथम सत्र के दौरान तीन मार्च को अध्यक्ष गुप्ता ने आदेश दिया था कि किसी भी विधायक को यदि निलंबित किया जाता है या मार्शल के माध्यम से बाहर किया जाता है तो उसे विधानसभा परिसर पूरी तरह से खाली करना होगा।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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