दिल्ली में नेहरू प्लेस के पास इस जगह का नाम मस्जिद मोठ कैसे पड़ा?
- Authored by: Pooja Kumari
- Updated Feb 8, 2026, 03:56 PM IST
दिल्ली के नेहरू प्लेस के पास एक इलाका है, जिसका नाम मस्जिद मोठ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस नाम के पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है। दिल्ली के इस ऐतिहासिक स्थान के बारे शायद कम लोगों को ही बता होगा, आइए जानते हैं कैसे इस स्थान को 'मस्जिद मोठ' कहा जाने लगा।
मोठ मस्जिद (फाइल फोटो)
Masjid Moth Delhi Story: दिल्ली के नेहरू प्लेस के पास स्थित मस्जिद मोठ सिर्फ एक इलाके का नाम नहीं, बल्कि अपने अंदर एक बेहद दिलचस्प कहानी छुपाए हुए है। हजारों लोग रोजाना इस इलाके से गुजरते हैं, नाम लेते हैं, बोर्ड पर इसका नाम पढ़ते हैं- मगर बहुत कम लोग जानते हैं कि इस नाम के पीछे की वजह क्या है। यह कहानी किसी राजा या युद्ध से नहीं, बल्कि एक साधारण सी दाल से जुड़ी है, यही सादगी इसकी पहचान और कहानी को खास बनाती है।
मोठ की मस्जिद से मिला नाम
मस्जिद मोठ, इलाके का नाम यहां पर स्थित मोठ की मस्जिद के कारण पड़ा। इस मस्जिद को मोठ मस्जिद भी कहा जाता है। मस्जिद मोठ के नाम की कहानी हमें लोदी वंश के शासनकाल में लेकर जाती है, इसी समय 1505 में इस मस्जिद को बनवाया गया। इसके निर्माण की कहानी ही इसे और ऐतिहासिक इमारतों से अलग और खास बनाती है। सिकंदर लोदी के शासनकाल में उनके वजीर मियां भोईया ने इस मस्जिद का निर्माण कराया। लेकिन उन्होंने इसके लिए चंदा या दान में पैसे नहीं मांगे, बल्कि एक अनोखा रास्ता चुना।
मस्जिद मोठ कैसे बनी?
पहले तो ये जान लीजिए की आखिर मोठ का मतलब क्या होता है। दरअसल मोठ एक प्रकार की दाल होती है। कहा जाता है कि सिकंदर लोदी एक बार पास की एक मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए गए थे। जहां घुटने टेकते वक्त एक पक्षी की चोंच से मोठ यानी दाल का दाना गिर गया। सिकंदर लोदी ने इस दाने को देखा तो उसे उठा लिया। उन्होंने इस दाने को अपने वजीर मियां भुईयां को दे दिया। जिसे भुईयां ने एक बगीचे में बो दिया। यह एक दाना कुछ समय में पौधा बन गया और उससे बीज निकल आए। जिसे उन्होंने फिर से बो दिया। कई सालों तक उन्होंने मोठ के दाने को बार-बार बोया। मियां भुईयां ने इससे पैदा हुई फसल को बेच दिया और उससे कमाए पैसे से 1505 में इस मस्जिद का निर्माण कराया। मोठ बेचकर कमाए पैसे से बनी इस मस्जिद का नाम मोठ मस्जिद रखा गया।
मोठ मस्जिद के कारण इलाके को मिला नाम
इस मस्जिद के निर्माण के बाद धीरे-धीरे यह पूरा इलाका ही मस्जिद मोठ के नाम से जाने जाने लगा। समय के साथ दिल्ली बदली, खाली जमीनों पर ऊंची इमारतें, सड़कें, मॉल, आदि बने। लेकिन इस इलाके का नाम आज भी उसी कहानी को जिंदा रखे हुए है। मस्जिद मोठ आज दक्षिण दिल्ली का एक प्रमुख रिहायशी और व्यावसायिक इलाका है। यह नेहरू प्लेस, कालकाजी और ग्रेटर कैलाश जैसे इलाकों से जुड़ा हुआ है। लेकिन मस्जिद मोठ आज भी एक ऐसा नाम, जो यह याद दिलाता है कि इतिहास हमेशा किसी महल या किले में नहीं होता, कभी-कभी वह दाल के एक दाने से भी बन जाता है।
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