पंजाब सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा का नया आधार बन रही है। योजना के तहत हर परिवार को प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे दिल की बीमारियों, कैंसर और जन्म से जुड़ी जटिलताओं जैसी गंभीर स्थितियों में समय पर चिकित्सा सुनिश्चित हो रही है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार दिल के दौरे और स्ट्रोक में कुछ मिनटों की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि इलाज के दौरान परिवार अक्सर खर्च के बारे में सोचकर देरी कर देते हैं, ऐसे में ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ जैसी पहल समय पर इलाज की दिशा में बड़ा फर्क पैदा करती है।
पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मुताबिक अब तक 33 लाख से ज्यादा परिवार इस योजना के तहत पंजीकृत किए जा चुके हैं। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के ताजा आंकड़ों में बताया गया है कि योजना के तहत लगभग 1,98,793 मुफ्त इलाजों को मंजूरी दी गई है, जिन पर 3,30,01,32,533 रुपये खर्च हुए हैं। अस्पतालों को अब तक 59 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। इन इलाजों में डायलिसिस, दिल की सर्जरी, कैंसर थेरेपी और अन्य गंभीर प्रक्रियाएं प्रमुख हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसी आपात स्थितियों में कुछ मिनटों की देरी भी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है, लेकिन परिवार इलाज पर होने वाले खर्च को लेकर झिझक दिखाते हैं। डॉक्टर ईशा अरोड़ा का कहना है कि योजना इस झिझक को कम कर रही है और मरीज समय पर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी परिवार को आर्थिक तंगी के कारण इलाज में देरी न करनी पड़े। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी नामांकन बढ़ाने, जागरूकता फैलाने और दावों की प्रक्रिया सरल बनाने पर लगातार काम कर रही है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में निवारक स्वास्थ्य परीक्षण अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। पंजाब में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के लिए यह योजना न सिर्फ वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि गंभीर बीमारियों के समय पर इलाज को भी सुनिश्चित कर रही है।
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