छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था के निजीकरण के मुद्दे पर छिड़ी सियासी जंग के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विपक्ष (कांग्रेस) के आरोपों को पूरी तरह भ्रामक, आधारहीन और तथ्यहीन करार दिया है। मुख्यमंत्री ने रविवार को स्थिति साफ करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की बिजली कंपनियों के निजीकरण की कोई मंशा नहीं है और इस विषय पर जनता के बीच जानबूझकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बिजली विभाग में नियमित सुधारों और जनसुनवाई की प्रक्रिया को निजीकरण से जोड़ना सर्वथा गलत है।
'रूटीन जनसुनवाई को निजीकरण से जोड़ना गलत'
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि बिजली व्यवस्था को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए समय-समय पर नियम के तहत प्रशासनिक व तकनीकी जनसुनवाइयां आयोजित की जाती हैं। जिस जनसुनवाई को लेकर कांग्रेस निजीकरण का मुद्दा बना रही है, वह एक सामान्य और रूटीन प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसी रूटीन प्रक्रियाओं का यह अर्थ बिल्कुल भी नहीं निकाला जाना चाहिए कि सरकार पावर डिस्ट्रीब्यूशन या उत्पादन को निजी हाथों में सौंपने जा रही है।
'मुद्दाविहीन कांग्रेस कर रही दुष्प्रचार'
विपक्ष पर करारा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई ठोस और विकासात्मक मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह जनता के मन में गलतफहमी और डर का माहौल पैदा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा की तरह इस संवेदनशील विषय में भी दुष्प्रचार कर जनता को गुमराह कर रही है। प्रदेश की जनता को इस तरह के भ्रामक बयानों से भ्रमित होने या डरने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। हमारी सरकार जनहित और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
किसान और आम उपभोक्ताओं के हितों की होगी रक्षा
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत ही बिजली कंपनियों को मजबूत बनाने का काम कर रही है। सरकार हर नागरिक, ग्रामीण और किसान को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली प्रदान करने के संकल्प पर कायम है। सार्वजनिक बिजली कंपनियों के ढांचे को मजबूत करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। किसी भी सूरत में उपभोक्ताओं और किसानों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
