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CEPA : अमेरिका की नाक के नीचे भारत करने जा रहा बड़ी डील, चीन की भी बढ़ेगी टेंशन

भारत इन दिनों तेजी से दुनिया के तमाम देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते कर रहा है। ये समझौते रणनीतिक हितों को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं। फिलहाल, अमेरिकी महाद्वीप में दो देशों के साथ डील की तैयारी है।

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चिली और अर्जेंटीना के साथ होगी डील

भारत अब अमेरिकी की नाक के नीचे लैटिन अमेरिका में अपनी आर्थिक और रणनीतिक पकड़ मजबूत करने की तैयारी में है। चिली के साथ कॉम्प्रेहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट यानी CEPA पर बातचीत को इस साल के अंत तक पूरा करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, अर्जेंटीना के साथ भारत ने लिथियम, फार्मा, कृषि, 5G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में अहम प्रगति की है। यह सिर्फ व्यापार बढ़ाने की कोशिश नहीं है। भारत की नजर नए बाजारों के साथ-साथ क्रिटिकल मिनरल्स और मजबूत सप्लाई चेन पर भी है।

चिली के साथ बड़ी ट्रेड डील

26 अगस्त को वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सैंटियागो में चिली की उप-मंत्री पाउला एस्तेवेज वाइनस्टीन से मुलाकात कर CEPA बातचीत को आगे बढ़ाया। प्रस्तावित समझौते में हेल्थकेयर, फार्मा, ऊर्जा, खनिज, कृषि, मशीनरी और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर अहम हैं। भारत और चिली के बीच पहले से प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट यानी PTA लागू है, जिसे 2016 में विस्तार दिया गया था। अब CEPA के जरिये बाजार पहुंच और निवेश को और व्यापक बनाने की तैयारी है। 2025 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 5.38 अरब डॉलर पहुंच गया, जो 2024 के 3.84 अरब डॉलर से ज्यादा है। भारत का चिली को निर्यात 1.41 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 3.97 अरब डॉलर पहुंचा।

क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ा दांव

चिली भारत के लिए सिर्फ निर्यात बाजार नहीं है। क्रिटिकल मिनरल्स भी बातचीत का अहम हिस्सा हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक चिली की तरफ से मार्केट एक्ससे और भारत की तरफ से क्रिटिकल मिनरल से जुड़े मुद्दे अभी बातचीत में हैं। चिली दुनिया में लिथियम, तांबा और चांदी जैसे खनिजों के सबसे बड़े निर्यातकों में शामिल है। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और क्लीन-टेक इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम हैं। ऐसे में चिली के साथ गहरे आर्थिक रिश्ते भारत की भविष्य की सप्लाई चेन के लिए अहम हो सकते हैं।

अर्जेंटीना में भी बढ़ी भारत की मौजूदगी

24 अगस्त को ब्यूनस आयर्स में इंडिया-अर्जेंटीना जॉइंट ट्रेड कमिटी की चौथी बैठक हुई। राजेश अग्रवाल की अगुवाई में भारत का अब तक का सबसे बड़ा बिजनेस डेलिगेशन अर्जेंटीना पहुंचा, जिसमें 25 से ज्यादा कारोबारी नेता शामिल थे। 2025 में दोनों देशों का व्यापार 6.5 अरब डॉलर से ज्यादा रहा और भारत अर्जेंटीना का पांचवां सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बन गया। अर्जेंटीना ने भारतीय फार्मास्युटिकल उत्पादों के लिए रेगुलेटरी बैरियर कम करने के लिए भारत को Annex II से Annex I में अपग्रेड करने की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे भारतीय दवा कंपनियों के लिए बाजार में प्रवेश आसान हो सकता है। वहीं, भारत ने KABIL के जरिये कैटामारका में लिथियम प्रोजेक्ट पर काम शुरे कर दिया है। इसके तहत दूसर चरण की ड्रिलिंग पूरी हो चुकी है। इसके अलावा साल्टा तथा जुजुय में भी आगे के अवसर तलाशे जा रहे हैं।

5G से स्पेस तक नया मोर्चा

भारत और अर्जेंटीना ने 5G, AI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एविएशन और स्पेस टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। ISRO और अर्जेंटीना की CONAE के बीच प्रस्तावित बैठक भी इसी दिशा का हिस्सा है।

चीन के लिए क्यों अहम?

भारत की यह सक्रियता लैटिन अमेरिका में उसकी आर्थिक मौजूदगी बढ़ा रही है। खासकर क्रिटिकल मिनरल्स, लिथियम और नई सप्लाई चेन के जरिए भारत को रणनीतिक विकल्प मिल सकते हैं। यही वजह है कि चिली और अर्जेंटीना के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी को चीन के लिए भी अहम माना जा रहा है। हालांकि यह कदम किसी एक देश के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत के नए बाजार, निवेश और संसाधन सुरक्षित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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