CM Suvendu Adhikari PA: पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे सीबीआई और मुजफ्फरनगर पुलिस की संयुक्त टीम ने पकड़ा है। जानकारी के अनुसार आरोपी राजकुमार जिसे राज सिंह के नाम से भी जाना जाता है, हरिद्वार से दिल्ली की ओर भागने की कोशिश कर रहा था, तभी उसे एनएच-58 स्थित छपार टोल प्लाजा के पास दबोच लिया गया। वह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का रहने वाला है और उसका पूरा पता रसड़ा क्षेत्र के रतोपुर सांवरा गांव का बताया जा रहा है।
3 शार्प शूटर पहले से ही गिरफ्तार
घटना के बाद से ही आरोपी का मोबाइल फोन बंद था, जिससे उसकी लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल हो रहा था। फिलहाल सीबीआई और बंगाल पुलिस की संयुक्त टीम बलिया क्षेत्र में अन्य संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। इस मामले में कोलकाता पुलिस पहले ही उत्तर प्रदेश से तीन शार्प शूटरों को गिरफ्तार कर चुकी है, जो 23 मई तक सीबीआई की कस्टडी में है। बता दें कि शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या 6 मई को कोलकाता से लगभग 7 किलोमीटर दूर दोहरिया लेन इलाके में की गई थी।
विधानसभा चुनावों के दो दिन बाद हुई घटना
यह वारदात उस समय हुई जब बंगाल विधानसभा चुनावों में बीजेपी की बड़ी जीत के दो दिन ही बीते थे, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस के मुताबिक, चंद्रनाथ रथ की एसयूवी को उनके घर के पास एक सिल्वर रंग की कार ने रोका था, जिसके बाद दोपहिया वाहनों पर आए हथियारबंद हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने बेहद नजदीक से गोलीबारी कर रथ की हत्या कर दी और बाद में वाहन छोड़कर अन्य साधनों से मौके से फरार हो गए। जांच के दौरान कई आरोपियों के संबंध उत्तर प्रदेश से जुड़े पाए गए। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
फिलहाल मामले की जांच जारी
जांच एजेंसियां इस बात की गहन पड़ताल कर रही हैं कि उत्तर प्रदेश और बिहार से आए इन अपराधियों को पश्चिम बंगाल में किसने पनाह दी और हत्या को अंजाम देने के लिए हथियार व अन्य जरूरी संसाधन किसने उपलब्ध कराए। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय बना हुआ है कि इस कथित ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ के लिए कितनी रकम तय की गई थी और वह धनराशि आरोपियों तक किस माध्यम से पहुंचाई गई। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस पूरी साजिश में कौन-कौन लोग आर्थिक और लॉजिस्टिक स्तर पर शामिल थे। एजेंसियों का मानना है कि जिस तरह से पहले रेकी की गई और फिर बेहद पेशेवर तरीके से गोलीबारी को अंजाम दिया गया, उससे साफ संकेत मिलते हैं कि इस वारदात के पीछे एक संगठित और फैला हुआ नेटवर्क सक्रिय था।
