Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि जाति व्यवस्था समाज को संगठित करने के लिए है, लेकिन जातिवाद सामाजिक ढांचे को कमजोर करता है और देश को बांटता है। जालोर के सिर मंदिर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि धर्म को समाज में एकता की शक्ति के रूप में कार्य करना चाहिए।
कहा- जातिवाद व्यवस्था को कमजोर करता है
आदित्य ने कहा, जाति समाज को व्यवस्थित रूप से चलाने का साधन होनी चाहिए, लेकिन जातिवाद उस व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने कहा, पिछली सरकारों ने जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर लोगों को बांटने में विश्वास किया, जिससे देश कमजोर हुआ और कश्मीर में अशांति, नक्सलवाद, भाषाई विवाद और जातिगत संघर्ष जैसी चुनौतियां पैदा हुईं। शासन के लाभ अक्सर दलितों, गरीबों और अन्य हाशिए पर पड़े वर्गों तक नहीं पहुंच पाए।
सीएम योगी ने कहा, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है। उनके नेतृत्व में देश एकजुट हुआ है। कश्मीर और नक्सलवाद के मुद्दों को सुलझाने के लिए कदम उठाए गए हैं, साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि कल्याणकारी योजनाएं बिना किसी भेदभाव के सभी तक पहुंचें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार देशभर में बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
सीएम ने विकास कार्य गिनाए
आदित्यनाथ ने कहा, जिन इलाकों में पहले सड़कें नहीं थीं, वहां अच्छी सड़कें बनाई गई हैं, रेल संपर्क का विस्तार किया गया है, वहीं जिन इलाकों में हवाई अड्डे, मेट्रो, चिकित्सा संस्थान और इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं थे, वहां इनका निर्माण किया गया है। केंद्र में पूर्व यूपीए सरकार को निशाना बनाते हुए आदित्यनाथ ने दावा किया कि उसने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं को पिछड़ा हुआ माना। उन्होंने कहा, इसके विपरीत, वर्तमान नेतृत्व ने यह स्वीकार किया है कि हमारी आस्था सनातन धर्म से गहराई से जुड़ी हुई है और आस्था के बिना समाज आगे नहीं बढ़ सकता।
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का जिक्र करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि यह दशकों पहले बन सकता था, लेकिन पिछली सरकारों ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की और यहां तक कि भगवान राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, राम मंदिर का निर्माण अब भव्य रूप से प्रगति कर रहा है। जब लोग दृढ़ संकल्प के साथ एकजुट होते हैं, तभी राम मंदिर जैसी उपलब्धियां संभव हो पाती हैं।
वाराणसी में काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर के विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पहले एक समय में केवल सीमित संख्या में श्रद्धालु ही मंदिर में दर्शन कर सकते थे, लेकिन अब हजारों लोग एक साथ दर्शन कर सकते हैं। मथुरा और वृंदावन में भी श्रद्धालुओं के लिए इसी तरह की व्यवस्था की जा रही है।
