दिल्ली के तिलक नगर इलाके में हुई थप्पड़ मारने की घटना को लेकर बीजेपी नेता और मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। दिल्ली पुलिस ने इसे लेकर प्रवेश वर्मा के खिलाफ एनसीआर के तहत BNS की धारा 115 के तहत केस दर्ज किया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साहिब सिंह नाम के शख्स ने प्रवेश वर्मा के खिलाफ थप्पड़ मारने की शिकायत दी थी।उनकी शिकायत के हिसाब से कानूनन जो केस बनता था उसके हिसाब से प्रवेश वर्मा के खिलाफ केस (NCR)दर्ज कर लिया है, अब मामले में जांच की जाएगी।
क्या है पूरा मामला, जिसमें हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि ये घटना रविवार को पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में हुई। प्रवेश वर्मा जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर चौक से नजफगढ़ ड्रेन के बीच आउटर रिंग रोड पर चल रहे सड़क मरम्मत कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इसी दौरान साहिब सिंह नाम के युवक द्वारा निरीक्षण की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही थी। तभी प्रवेश वर्मा ने उस व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया।
इसके बाद इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ। मौके पर तिलक नगर से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक जरनैल सिंह भी मौजूद थे। बताया गया कि उन्होंने नई बिछाई गई सड़क की सतह की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए हाथ से उसका कुछ हिस्सा निकालकर दिखाया। इस दौरान संबंधित व्यक्ति कथित तौर पर पूरी घटना को कैमरे में रिकॉर्ड कर रहा था।
बाद में जरनैल सिंह ने दिल्ली सरकार पर सड़क निर्माण में घटिया काम कराने का आरोप लगाया। वहीं प्रवेश वर्मा ने आरोप लगाया कि कुछ AAP कार्यकर्ता सरकारी अधिकारियों को उनके काम में बाधा डालने की कोशिश कर रहे थे। वर्मा ने यह भी दावा किया कि जिस व्यक्ति को उन्होंने थप्पड़ मारा, वह AAP से जुड़ा था और उसके खिलाफ पहले भी मामला दर्ज रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
PWD ने भी AAP विधायक के खिलाफ दी शिकायत
इस मामले में विवाद दोनों पक्षों की शिकायतों तक पहुंच गया है। लोक निर्माण विभाग ने तिलक नगर थाने में विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ भी शिकायत दी है। विभाग का आरोप है कि उन्होंने सरकारी अधिकारियों को उनके काम के दौरान बाधित किया।क्या होती है NCR
पुलिस ने प्रवेश वर्मा के खिलाफ जो रिपोर्ट दर्ज की है, वह गैर-संज्ञेय अपराध (Non-Cognisable Report) से संबंधित है। ऐसे मामलों में पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जांच शुरू नहीं कर सकती। किसी मामले का संज्ञेय या गैर-संज्ञेय होना संबंधित अपराध और लागू कानून के प्रावधानों पर निर्भर करता है।
