बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य बनने का मन बना लिया है। आज दोपहर 2 बजे उन्होंने राज्यसभा के लिए नामांकन भी भर दिया। उनके इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या बिहार विधानसभा में सबसे बड़े दल के रूप में मौजूद भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाएगी। या नीतीश कुमार के कहने पर JDU के किसी नेता को सीएम की कुर्सी पर बिठाया जाएगा? क्या सबको चौंकाते हुए NDA की तरफ से LJP (Ramvilas) के अध्यक्ष युवा बिहारी चिराग पासवान को राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद राज्य की सियासत में सबसे बड़ा प्रश्न यही उठ रहा है कि अब बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। इस चर्चा के केंद्र में सबसे ज्यादा जिस नाम की चर्चा हो रही है, निश्चित तौर पर चिराग पासवान (Chirag Paswan) तो नहीं हैं। लेकिन राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड और ओडिशा के उदाहरणों को देखें तो ऐसा हो भी सकता है। हालांकि, चर्चा में जो नाम हैं उनमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।
चिराग पासवान राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से उभरे बिहारी युवा नेताओं में गिने जाते हैं। वे दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) के बेटे हैं और उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। चिराग वर्तमान में लोक जनशक्ति पार्टी (Ram Vilas) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और केंद्र की NDA सरकार में महत्वपूर्ण सहयोगी दल के रूप में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की भूमिका निभा रहे हैं।
चिराग पासवान ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत साल 2014 में की थी। चिराग ने बिहार की जमुई लोकसभा सीट से जीत दर्ज की और पहली बार सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में भी जमुई से ही जीत दर्ज की। हालांकि 2024 के आम चुनावों में उन्होंने अपने पिता की पारंपरिक सीट हाजीपुर से चुनाव लड़ा और लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए। इसमें कोई शक नहीं कि युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और आक्रामक राजनीतिक शैली ने उन्हें बिहार की राजनीति में एक अलग पहचान दी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चिराग पासवान ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का नारा देकर राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी थी थी। हालांकि, उस चुनाव में उनकी पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन चिराग पासवान राज्य के युवाओं और दलित मतदाताओं के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाने में कामयाब रहे।
2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी पार्टी के कैंपेन को बेहतरीन तरीके से आगे बढ़ाया। उनकी रैलियों में बड़ी संख्या में युवा पहुंचे। इसके अलावा केंद्र सरकार में उनकी सक्रिय भूमिका और एनडीए के साथ मजबूत रिश्ते भी उन्हें संभावित मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शामिल करते हैं। हालांकि, बिहार की सत्ता की राजनीति कई समीकरणों पर निर्भर करती है और अंतिम फैसला गठबंधन दलों, विशेषतौर पर भाजपा और जेडीयू की सहमति से ही होगा।
फिलहाल नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद बिहार में राजनीतिक चर्चाओं का दौर गर्म हो गया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाती है, लेकिन इतना तय है कि चिराग पासवान की दावेदारी को नकारा नहीं जा सकता है। हालांकि, भाजपा और जेडीयू के मुकाबले उनकी पार्टी के पास बहुत कम सीटें हैं और वह गठबंधन में तीसरे नंबर की पार्टी हैं।
