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मिथुन चक्रवर्ती की जेब से बटुआ गायब, चुनावी मंच पर चूना लगा गया शातिर

झारखंड के धनबाद में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आयोजित भाजपा की चुनावी रैली में फिल्म अभिनेता से नेता बने मिथुन चक्रवर्ती की जेब से किसी शातिर ने बटुआ साफ कर दिया। मंच से भाजपा नेताओं ने मिथुन दा का पर्स वापस करने की अपील की, लेकिन उनका पर्स वापस नहीं मिला।

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मिथुन चक्रवर्ती का पर्स चोरी

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

धनबाद: झारखंड मे होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर मंगलवार को धनबाद जिले के निरसा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार अपर्णा सेन गुप्ता के समर्थन में जनसभा का आयोजन किया गया था, जहां अपने उम्मीदवार के समर्थन में फिल्म अभिनेता से नेता बने मिथुन चक्रवर्ती वोट मांगने पहुंचे थे। पुराने फिल्मी हीरो की एक झलक पाने के लिए भारी संख्या में भीड़ जमा थी, जिसके बीच से मिथुन दा फंस गए। भीड़ में किसी पॉकेट मार ने उनकी जेब पर हाथ साफ करते हुए पर्स गायब कर दिया।

दरअसल, कलिया सॉल में भाजपा द्वारा आयोजित एक जनसभा को सम्बोधित करने पहुंचे भाजपा के स्टार प्रचारक भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती की भीड़ में किसी पॉकेट मार ने पॉकेट मार दी। मिथुन चक्रवर्ती को देखने के लिये जनसभा में हजारों की संख्या लोग पहुंचे थे। इस भीड़ को संभालने के किये किसी तरह की न तो कोई व्यवस्था थी और न ही कोई सुरक्षा। यही कारण था कि लोगों की भीड़ मंच तक पहुंच गई। भीड़ मिथुन दा की एक झलक पाने के लिए उनकी फोटो अपने मोबाइल फोन में उतारने के लिये धक्का- मुक्की तक करने लगी। भीड़ का फायदा उठाकर पॉकेट मारों ने पॉकेट मारी शुरू कर दी। इसी में किसी का हाथ मिथुन चक्रवर्ती की जेब तक पहुंच गया। शातिर तुरंत मौका पाते ही पर्स लेकर भाग निकला।

घटना की जानकारी मिथुन दा ने भाजपा नेताओं को दी तो भाजपा नेताओं ने भरी मंच से पॉकेट मारों को मिथुन दा का पर्स वापस करने को कहा। लेकिन किसी ने मिथुन दा का पर्स वापस नहीं किया। जिस कारण वे कार्यक्रम जल्द ही ख़त्म करके चले गए।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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