कहते हैं रिश्तों से बढ़कर कुछ नहीं होता - इस बात को 19 साल के एक छात्र ने एक बार फिर सच कर दिया। जब उसके सामने एक ओर बोर्ड परीक्षा और NEET जैसे बड़े सपने थे, वहीं दूसरी ओर दादी की जिंदगी का सवाल था, तो ऐसे मुश्किल समय में उसने बिना हिचक अपने सपनों की उड़ान को कुछ समय के लिए रोककर इंसानियत और परिवार को चुना। उसके इस फैसले ने मानवता की नई मिसाल कायम कर दी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के हाजीपुर के रहने वाले 19 वर्षीय आदित्य राज ने अपनी दादी की जान बचाने के लिए 12वीं बोर्ड और NEET परीक्षा छोड़कर लिवर डोनेट किया। आदित्य की 62 वर्षीय दादी सुनीता देवी लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से बीते एक साल से जूझ रही थीं। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिसके चलते उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा था। जब दादी की हालत ज्यादा गंभीर हो गई, तो परिवार उन्हें इलाज के लिए नोएडा के वैशाली स्थित मैक्स अस्पताल लेकर गया। जहां डॉक्टरों ने साफ कहा कि उनकी जान बचाने का एकमात्र उपाय लिवर ट्रांसप्लांट है और ऑपरेशन जल्द से जल्द करना होगा।
पिता-बुआ नहीं बन सके डोनर, तो आगे आया आदित्य
आदित्य के परिवार में उसके पिता और बुआ संभावित डोनर थे, लेकिन स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्हें डोनर नहीं बनाया जा सका। ऐसे में आदित्य ने अपनी दादी की जान बचाने के लिए खुद आगे आकर डोनर बनने का फैसला लिया। लेकिन ऑपरेशन की डेट ऐसे समय पर तय हुई, तब उसके करियर का एक महत्वपूर्ण समय था, यानी बोर्ड परीक्षाएं। आदित्य की सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से 27 मार्च के दौरान थी। इसी बीच 12 मार्च को टांसप्लांट की तारीख तय हुई। इसके बावजूद आदित्य ने बिना हिचकिचाए अपनी परीक्षा और नीट की तैयारी को छोड़कर दादी की जिंदगी को चुना।
सफल ऑपरेशन के बाद दादी अस्पताल से डिस्चार्ज
अस्पताल में डॉक्टरों की कड़ी जांच, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और कानूनी प्रक्रिया के बाद आदित्य को सर्जरी के लिए मंजूरी मिल गई। जिसके बाद वह अपने परिवार का पहला जीवित डोनर बना। करीब 10 घंटे तक चली सर्जरी में आदित्य के लिवर का एक हिस्सा दादी को ट्रांसप्लांट किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, लिवर ट्रांसप्लांट की यह प्रक्रिया बहुत संवेदनशील होती है, लेकिन सफल ऑपरेशन के बाद दोनों की हालत स्थिर रही। लगभग 14 दिन बाद सुनीता देवी को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया और आदित्य भी धीरे-धीरे पूरी तरह स्वस्थ होकर अपनी सामान्य जिंदगी में लौट आया है।
डॉक्टर बनना चाहता है आदित्य
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आदित्य ने बताया मैं अपनी 12वीं की परिक्षाओं के लिए पूरी तरह से तैयार था। लेकिन परिवार से ज्यादा जरूरी कुछ भी नहीं है। उसने कहा कि परीक्षा अगले साल फिर से दी जा सकती है, इसलिए मैंने परीक्षाएं न देने और अपनी दादी की जान बचाने में अपना योगदान देने का फैसला किया। आदित्य का सपना डॉक्टर बनने का है, उसने इस साल NEET का अपना पहला प्रयास करने की योजना बनाई थी। लेकिन अब वह अगले साल नीट की परीक्षा देगा।
