Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। 8 सीटों पर हुए एमएलसी चुनाव में निर्दलीय के तौर पर जीत दर्ज करने वाले दोनों नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। बंशीधर बृजवासी और राहुल राज ने शनिवार को बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। दोनों नेताओं ने कहा कि वे शिक्षकों और छात्रों के मुद्दों पर सरकार के साथ रहकर काम करना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने बीजेपी का समर्थन करने का फैसला किया है। राहुल राज सारण शिक्षक स्नातक सीट से जीते हैं, जबकि बंशीधर बृजवासी ने तिरहुत स्नातक सीट पर जीत हासिल की है।
CM से मुलाकात के बाद दोनों विधायकों ने लिया फैसला
बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं की उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया गया। सदस्यता ग्रहण के बाद विधान परिषद में बीजेपी की ताकत बढ़ गई है। चुनाव के बाद बीजेपी की सीटें घटकर 24 रह गई थीं, लेकिन इन दोनों के समर्थन के बाद अब आंकड़ा 26 पर पहुंच गया है। गौरतलब है कि 23 अक्टूबर को 8 सीटों पर मतदान हुआ था। इसमें बीजेपी ने 3, जेडीयू ने 1, आरजेडी ने 1 और जन सुराज ने 1 सीट जीती थी, जबकि 2 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया था। पटना शिक्षक सीट पर बीजेपी के दिग्गज नवल किशोर यादव को हार का सामना करना पड़ा था, उन्हें आरजेडी के डॉ. संजीव कुमार ने हराया था।
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RJD ने उठाए सवाल
वहीं, दोनों निर्दलीय एमएलसी के बीजेपी में शामिल होने पर राष्ट्रीय जनता दल ने कड़ी आपत्ति जताई है। आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा कि बिना शपथ ग्रहण के ही दोनों नवनिर्वाचित सदस्यों का बीजेपी में जाना पूरी तरह से गैरकानूनी है। यह संविधान, सदन की नियमावली और एंटी डिफेक्शन लॉ के खिलाफ है। शक्ति यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी लगातार संविधान से खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
BJP ने क्या बोला
दूसरी तरफ बीजेपी का कहना है कि दोनों नेता पहले से ही उनकी विचारधारा से जुड़े रहे हैं। राहुल राज पहले बीजेपी में ही थे और इस बार उन्होंने निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा था। उन्होंने जन सुराज के मौजूदा एमएलसी आफाक अहमद को हराया है। वहीं बंशीधर बृजवासी ने 2 साल पहले हुए उपचुनाव में जेडीयू से तिरहुत स्नातक सीट छीनी थी और इस बार अपनी सीट बरकरार रखी है। फिलहाल विधान परिषद में कुल 75 सीटें हैं, जिसमें एनडीए के पास अब बहुमत से ज्यादा का आंकड़ा मजबूत होता दिख रहा है।
