भोपाल

सतना में जहरीली गैस का चैंबर बना कुआं, 3 लोगों की दम घुटने से मौत; 2 लड़ रहे जिंदगी की जंग

मध्य प्रदेश के सतना में जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई। मृतक एक गाय का रेस्क्यू करने के लिए कुएं में उतरे थे।

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सतना में जहरीली गैस मौतें

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

सतना: जिले में एक गाय को बचाने के लिए कुएं में उतरे तीन लोगों की संदिग्ध जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई और दो अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि यह घटना बुधवार रात उमरी गांव में हुई। नागौद थाना प्रभारी अशोक पांडे ने बताया, "ग्रामीणों के एक समूह ने देखा कि एक गाय कुएं में गिर गई है जिसके बाद उनमें से तीन रस्सी के सहारे नीचे उतरे और गाय को बाहर निकाला गया।

कुएं में उतरे थे लोग

उन्होंने बताया कि कुएं में उतरने के बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। उनमें से एक व्यक्ति किसी तरह बाहर निकल आया और बेहोश हो गया। इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पांडेय ने बताया कि पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और उनकी मदद से कुछ स्थानीय निवासी गीले कपड़े से मुंह ढककर कुएं में उतरे और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला।

इनकी हुई मौत

उन्होंने कहा कि गांव वालों ने तीनों लोगों को कुएं से बाहर निकाल लिया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मौके पर बुलाए गए एक डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान अशोक सिंह (45), रामरतन (22) और विष्णु (24) के रूप में हुई है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को बचाने की कोशिश में दो अन्य लोग भी घायल हो गए, जिन्हें स्थानीय सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अधिकारी के अनुसार, उनमें से एक को बाद में छुट्टी दे दी गई जबकि डॉक्टर दूसरे की हालत पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुएं में गिरने से गाय की भी मौत हो गई। पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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