भोपाल

मध्य प्रदेश में उफान पर शिवना नदी, पशुपतिनाथ के गर्भ गृह में पहुंचा पानी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 17, 2023, 01:02 PM IST

MP News: मान्यता है की जिस वर्ष शिवना भगवान पशुपति नाथ का अभिषेक करती है, वह वर्ष इलाके के लिए खुशहाली भरा होता है। इस वर्ष लंबे इंतजार के बाद हुई बारिश में शिवना ने सीजन में पहली बार भगवान पशुपतिनाथ का अभिषेक किया है।

MP News: मध्य प्रदेश में भारी बारिश के बाद मंदसौर में शिवना नदी उफान पर है। शनिवार रात नदी में पानी की आवक बड़ने की वजह से शिवना नदी पर बने अटल सागर बांध के पाच गेट खोले गए। नदी में पानी का बहाव बढ़ने से पानी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश कर गया और भगवान पशुपतिनाथ की अष्ट मुखी प्रतिमा के चार मुख जलमग्न हो गए।

रविवार को शिवना नदी अपने रौद्र रूप में दिखाई दी। कैचमेंट एरिया में हुई तेज बारिश के चलते नदी में पानी की मात्रा बढ़ गई, जिसके चलते शनिवार देर रात अटल सागर बांध के पाच गेट खोले गए जिसके चलते पानी पशुपतिनाथ मंदिर परिसर और मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश कर गया।

लोगों की यह है मान्यता

माना जाता हैं की भगवान का अभिषेक करने के बाद शिवना नदी का रौद्र रूप शांत हो जाता है। इलाके में यह भी मान्यता है की जिस वर्ष शिवना भगवान पशुपति नाथ का अभिषेक करती है, वह वर्ष इलाके के लिए खुशहाली भरा होता है। इस वर्ष लंबे इंतजार के बाद हुई बारिश में शिवना ने सीजन में पहली बार भगवान पशुपतिनाथ का अभिषेक किया है।

प्रशासन अलर्ट पर

शिवना नदी समेत सभी नदी नालों के उफान पर आने की वजह से प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है और लोगो को जल बहाव वाले स्थानों से दूर सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है। वहीं बाढ़ जैसी विकट स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने इंतजाम किए है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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