भोपाल

ग्वालियर की सड़कें जर्जर, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संभाली कमान; मरम्मत के दिए निर्देश

ग्वालियर की सड़कें अब केवल शहरवासियों की चिंता का विषय नहीं, बल्कि राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद सड़कों की खस्ता हालत पर सवाल उठाए और सुधार की कमान संभाली है। पिछले 10 महीनों में शहर की कई सड़कें धसने की घटनाओं से जर्जर हो चुकी हैं, जिससे हालात बद से बदतर हो गए हैं।

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ग्वालियर की सड़कें जर्जर, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संभाली कमान; मरम्मत के दिए निर्देश

Gwalior Road Conditions: कभी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ये दावा किया था कि मध्यप्रदेश की सड़कें अमेरिका से बेहतर हैं लेकिन क्या आज कोई ये दावा कर सकता है। ग्वालियर में रहने वाला तो कभी नहीं, क्योंकि ग्वालियर की खस्ताहाल सड़कें प्रदेश की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गई हैं। अबकि विपक्ष या किसी विरोधी दल ने नहीं बल्कि खुद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर की सड़कों पर सवाल खड़े किए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के सड़कों को लेकर दिए गए बयान से पहले उनके समर्थक और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और जल संसाधन मंत्री और ग्वालियर के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट भी कैबिनेट की बैठक में सीएम डॉ मोहन यादव के सामने खस्ताहाल सड़कों का मुद्दा जोर शोर से उठा चुके हैं। सोचिए कि ग्वालियर की खस्ताहाल सड़कों की समस्या इस कदर बढ़ चुकी है कि अब इन खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत के लिए खुद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को कमान संभालनी पड़ी है।

लाल, पीले और हरे रंग से नक्शा बनाया जाएगा

दरअसल केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक वीडियो वायरल हुआ । वायरल वीडियो में वो अपने समर्थकों से कह रहे हैं कि ग्वालियर की सड़कों की हालत काफी खराब हो गई है। इसके बाद मीडिया ने सवाल किए तो सिंधिया ने कहा सड़कों की हालत काफी बदहाल है। मैंने इस पर सांसद जी से आधा घंटा चर्चा की है, हमने निर्देश दिए हैं कि ग्वालियर की सभी रोड़ का सर्वे करेंगे। इसे लाल, पीला और हरे रंग से नक्शा बनाया जाएगा। पूरा नक्शा बनने के बाद लाल और पीली श्रेणी की रोड़ के लिए जितनी लागत आएगी, उसका अनुमान लगाकर प्रेजेंटेशन बनाया जाएगा। फिर उसके बाद ग्वालियर की सड़कों की मरम्मत शुरु की जाएगी।

10 महीनों से ग्वालियर में सड़क धसने की खबरें

नेताजी प्रेजेंटेशन के इंतजार में हैं, लेकिन ग्वालियर के हर बाशिंदे को पता है कि कौन-कौन सी सड़क कब से खराब है। पिछले लगभग 10 महीनों से ग्वालियर में सड़क धसने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इसकी शुरुआत माधव नगर रोड से हुई थी। 19 जून को माधव नगर गेट वाली सड़क धस गई, अगले दिन यानी 20 जून को माधव नगर-चेतकपुरी रोड भी धंस गई। इसके बाद 23 और 24 जून को महल रोड धंसी, और फिर 29 जून को महल रोड पर दो बार धसने की घटनाएं हुईं। 1 जुलाई को भी महल रोड धंसी। इसके बाद 10 जुलाई को हुरावली रोड, 15 जुलाई को नाकाचंद्रवदनी रोड, और 18 जुलाई को दर्पण कॉलोनी की सड़क धस गई। 19 जुलाई को दर्पण कॉलोनी की सड़क एक और जगह पर धंस गई। जुलाई के अंत में, 30 जुलाई को शब्दप्रताप आश्रम की सड़क और 31 जुलाई को सिरोल रोड की डोगरपुर गांव वाली सड़क धंसी। ग्वालियर की सड़कों की यह लगातार खराब होती स्थिति शहरवासियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

सड़कों सहित अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा

ग्वालियर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का गृह जिला है। सिंधिया ने अंचल के सात दिवसीय दौरे के आखिरी दिन ग्वालियर की बदहाल सड़कों सहित अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ सारे दलों के नेता भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान बदहाल सड़कों पर नाराजगी जताते हुए सिंधिया ने जिम्मेदार अधिकारियों की जमकर लताड़ लगाई। साथ ही तय कार्ययोजना को समय सीमा में पूरा करने के सख्ती से निर्देश दिए। ये कहना गलत नहीं होगा कि ग्वालियर की खस्ताहाल सड़कों से परेशान होकर इसे सुधारने की कमान खुद सिंधिया जी ने सम्भाल ली है।

हालत बद से बदतर

सिंधिया ने प्रदेश सरकार के उनके गुट के मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में एक समीक्षा बैठक लेकर आगामी रूपरेखा बताई। हालांकि समीक्षा बैठक में स्थानीय सांसद की गैर मौजूदगी ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका जरूर दे दिया है। बता दें कि स्थानीय सांसद भरत सिंह कुशवाह नरेंद्र सिंह तोमर के खेमे से आते हैं। अंदरखाने की खबर ये भी है कि राजनीति और गुटबाजी के चलते सड़क और शहर दोनों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। ग्वालियर अंचल में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद से उस इलाके में बीजेपी कद्दावर नेता नरेंद्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों में वर्चस्व की जंग चलती रही है। ऐसे में विकास कार्यों के क्रेडिट की होड़ में बहुत सारे काम ठप्प हैं। दूसरी ओर नगर निगम कांग्रेस के कब्ज़े में है जबकि प्रदेश में सत्ता बीजेपी की है। ऐसे में विकास कार्यों में काफी अड़ंगे लग रहे हैं। ज़ाहिर है कि इस राजनीति का खामियाज़ा ग्वालियर की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

Makarand Kale
मकरंद कालेauthor

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।\nततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि\n\nसाल 2008 में by chance journalist बना। 2013 से by choice journalist हूं। कहते हैं ना कि अच्छे काम में पहले बहुत परेशानियां आती हैं। और बाद में उसी की आदत पड़ जाती है।

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