भोपाल

MP News: छतरपुर में चल रहे गरबा महोत्सव में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, कलावा बांधकर मिल रही एंट्री

छतरपुर के गरबा पंडाल में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। पंडाल के बाहर लगाए गए पोस्टरों में साफ तौर पर यह प्रतिबंध दर्शाया गया है। आयोजकों का कहना है कि यह कदम 'लव जिहाद' जैसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रवेश से पहले साधु-संतों और धर्माचार्यों द्वारा लोगों के हाथों पर कलावा बांधा जा रहा है, सिर पर तिलक लगाया जा रहा है और गौ मूत्र का छिड़काव कर उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है।

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गरबा पंडाल में गैर हिंदुओं की एंट्री बैन (सांकेतिक तस्वीर | PTI)

Photo : PTI

Chhatarpur News: नवरात्रि के अवसर पर मध्य प्रदेश के छतरपुर में आयोजित गरबा महोत्सव इस बार सख्त नियमों और धार्मिक परंपराओं के पालन के बीच सुर्खियों में है। हिंदू उत्सव समिति द्वारा आयोजित इस गरबा पंडाल में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।

प्रवेश से पहले तिलक और कलावा अनिवार्य

गरबा पंडाल के प्रवेश द्वार पर विशेष पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर साफ लिखा गया है कि केवल सनातन धर्म के अनुयायियों को ही प्रवेश मिलेगा। लव जिहाद की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से साधु-संत और धर्माचार्य उपस्थित लोगों के हाथों में कलावा बांध रहे हैं, माथे पर तिलक करवा रहे हैं और गौमूत्र का छिड़काव कर शुद्धिकरण करने के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है।

हिंदू उत्सव समिति का आयोजन

यह आयोजन लगातार 18 वर्षों से हिंदू उत्सव समिति के द्वारा करवाया जा रहा है। इस बार भी पारंपरिक गरबे की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ की गई। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सुरक्षित रखना है।

सुरक्षा व्यवस्था

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और युवा हिस्सा ले रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल भी पंडाल के बाहर तैनात किया गया है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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