मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि राज्य का गौरवशाली इतिहास है क्योंकि भगवान राम ने राज्य में 11 वर्ष बिताए थे, जबकि भगवान कृष्ण ने उज्जैन के आचार्य सांदीपनी आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने अपने सरकारी आवास पर आयोजित जन्माष्टमी कार्यक्रम में कहा कि इन्हीं कारणों से राज्य सरकार ने दोनों पूज्य देवताओं से जुड़े स्थानों को विकसित करने का निर्णय लिया है।
श्रीकृष्ण ने सांदीपनि आश्रम में प्राप्त की शिक्षा
सीएम ने कहा, “मध्यप्रदेश का गौरवशाली इतिहास है, क्योंकि भगवान राम ने यहां 11 वर्ष बिताए थे, जबकि भगवान कृष्ण ने उज्जैन के आचार्य सांदीपनि आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी। उनकी यादों को चिरस्थायी बनाने के लिए राज्य सरकार उनसे जुड़े स्थानों का विकास करेगी। हम भगवान कृष्ण की शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े शोध को भी बढ़ावा देंगे।”
नगरीय निकाय में बनेगा गीता भवन
सीएम ने कहा कि भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता बहुत प्रेरणादायक है और यह ऐतिहासिक है कि शिक्षा के लिए राज्य में आने के बाद कृष्ण ‘जगत गुरु’ के रूप में स्थापित हुए। इस अवसर पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भगवान कृष्ण से संबंधित अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए राज्य के विभिन्न शहरी क्षेत्रों में 'गीता भवन' स्थापित करने के कदम की सराहना की।
एमपी में श्रीकृष्ण से जुड़े प्रमुख स्थान
मध्य प्रदेश में भगवान श्री कृष्ण से संबंधित प्रमुख स्थलों में सांदीपनि आश्रम, नारायण धाम, अमझेरा धाम और जानापाव धाम शामिल है। जिन्हें तीर्थ के रूप में विकसित किए जाने का निर्णय लिया गया है। सांदीपनि आश्रम में भगवान कृष्ण ने शिक्षा ग्रहण की थी। नारायण धाम वह पवित्र स्थान है जहां श्री कृष्ण ने मित्र सुदामा से मुलाकात की थी। धार जिले के पास स्थित अमझेरा धाम में भगवान कृष्ण ने रुक्मिणी हरण के दौरान रुक्मी को युद्ध में हराया था। वहीं जानापाव में भगवान कृष्ण ने परशुराम जी से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया था।
(इनपुट - भाषा)
