शहरी इलाकों में मिडिल क्लास को उनके सपनों का घर देने की जिम्मेदारी ज्यादातर प्राइवेट बिल्डरों पर ही है। लेकिन बिल्डर की मनमानी और समय से काम पूरा न करने की वजह से मिडिल क्लास स्वयं को ठगा हुआ सा महसूस करता है। बिल्डरों की इसी मनमानी पर रोक लगाने के लिए बिहार में पुख्ता व्यवस्था की गई है। अगर बिहार में बिल्डर ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर घर-खरीददार को फ्लैट नहीं सौंपा तो उस पर 20 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
भू संपदा विनियामक प्राधिकरण (RERA), बिहार ने घर परियोजना में देरी करने वाले बिल्डरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का निर्मय लिया है। इसके तहत बिल्डरों पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा। यही नहीं अगर बिल्डर किसी प्रोजेक्ट की समयावधि में विस्तार करवाना चाहता है, तो उसके लिए भी उसे अलग से निर्धारित शुक्ल चुकाना होगा।
आमतौर पर रेरा के सामने शिकायतें आती हैं कि बुकिंग के समय बिल्डर ने जो एग्रीमेंट किया था, उस निर्धारित अवधि में घर खरीददार को फ्लैट नहीं मिला। कई बार तो इसमें कई-कई वर्ष लग जाते हैं, जैसा कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कई लोग 10 साल से अधिक समय से अपना फ्लैट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में घर खरीददार स्वयं को घटा से महसूस करता है। लोगों को परेशानियों से बचाने और बिल्डरों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए रेरा-बिहार ने उन पर जुर्माना लगाने का प्रावधान रखा है।
10 महीने से ज्यादा देरी होने पर 20 लाख जुर्माना
रेरा-बिहार के नियमों के अनुसार अगर एग्रीमेंट में फ्लैट मिलने की निर्धारित अवधि समाप्त होने के 6 महीने बाद तक फ्लैट हैंडओवर करने पर 4 लाख रुपये का जुर्माना बिल्डर पर लगाया जाएगा। इसके बाद यानी 6 से 10 महीने की देरी होने पर 10 लाख रुपये और एक साल से ज्यादा देर होने पर बिल्डर को 20 लाख रुपये का जुर्माना चुकाना होगा।रेरा ने बिल्डरों और प्रोमोटरों की मनमर्जी पर लगाम लगाने के लिए कुछ और निर्णय भी लिए हैं। रेरा अधिनियम की धारा 4(2)(एल)(डी) के तहत प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद ऑडिट कराया हुआ खाता छह महीने के अंदर जमा कराना होगा। इसमें देरी करने वाले बिल्डरों को विलंब शुल्क के रूप में पचास हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी देना पड़ेगा।
रेरा की तरफ से हर तीन महीने में रैंकिंग जारी होगी, जिसमें इन सभी मानकों के अनुसार ही नंबर दिए जाएंगे। रैंकिंग रिपोर्ट रेरा की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। यही नहीं बिल्डरों को हर तीन महीने में प्रोग्रेस रिपोर्ट भी देनी होगी, जिसमें जियो टैग फोटो भी अनिवार्य है। रिपोर्ट के साथ अगर फोटो देने में 15 दिन की देरी होती है तो विलंब शुल्क के रूप में 10 हजार रुपये चुकाने होंगे। 16-30 दिन की देरी पर जुर्माना 30 हजार और 31-60 दिन की देर पर 75 हजार व 60 दिन से ज्यादा देरी होने पर दो लाख रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा।
