भोपाल

महाकाल मंदिर परिसर में नहीं ले जा सकेंगे मोबाइल, इसलिए लगा प्रतिबंध; फ्री नाश्ते का हुआ इंतजाम

उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर क्षेत्र में मोबाइल पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा व अन्य कारणों से चलते ये प्रतिबंध लगाया गया है।

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महाकाल मंदिर

उज्जैन : श्री महाकालेश्वर मंदिर में 24 अप्रैल से मोबाइल फोन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। मंदिर प्रशासन ने दर्शनार्थियों को चेकिंग पॉइंट पर ही अपना फोन जमा करने का फैसला लिया है। मंदिर प्रशासन ने भक्तों से मंदिर में मोबाइल का उपयोग न करने का अनुरोध किया है, ताकि दर्शन के दौरान शांति व्यवस्था कायम रहे। जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा व अन्य कारणों से चलते ये प्रतिबंध लगाया गया है। इसके लिए सभी द्वारों पर लॉकर सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि लोग अपना मोबाइल रख सकें।

मंदिर परिसर में धार्मिक परंपरा, शुचिता और पवित्रता के चलते मोबाइल रखे जाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। मोबाइल के द्वारा नंदिहाल, गर्भगृह, दर्शन के समय फोटो लेने और वीडियो आदि बनाने से न सिर्फ अन्य यात्रीगण परेशान होते हैं, बल्कि दर्शन पंक्ति में अनावश्यक रुककर अव्यवस्था फैलाई जाती है। लिहाजा, महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने मंदिर परिसर में मोबाइल फोन ले जानें पर रोक लगा दी गई है।

महाकालेश्वर के बाहर फ्री नाश्ते का प्रबंध

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने भस्मारती दर्शनार्थियों के लिए सुबह 6 से 8 बजे तक फ्री पोहे के अल्पाहार की व्यवस्था पुनः शुरू की है। काउंटर से टोकन लेकर भक्त अन्नक्षेत्र में नाश्ता कर सकते हैं। यह सुविधा पहले भी थी, जो अब दोबारा शुरू की गई है। एबीपी की खबर के हवाले से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, रोजाना मंदिर परिसर में भस्म आरती में लगभग 1600 श्रद्धालु दर्शन लाभ लेते हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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