भोपाल

MP में कोरोना से पांचवीं मौत; नए वेरिएंट से वैक्सीन लगवा चुके लोग भी हो रहे संक्रमित

मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस के कारण एक 52 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जो इस महामारी में राज्य की पांचवीं मौत है। महिला के फेफड़ों में गंभीर सूजन थी, जिससे उन्हें सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ा। चिकित्सकों के अनुसार, महिला को हाईपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस की समस्या थी।

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मध्य प्रदेश में कोविड से पांचवी महिला की मौत

Bhopal: मध्यप्रदेश में इस साल कोविड-19 से पांचवीं मौत दर्ज की गई है। भिंड निवासी 52 वर्षीय महिला का ग्वालियर में इलाज चल रहा था, जहां सोमवार रात उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक, महिला को हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस (एक्यूट लंग इंजरी) थी और वह कोरोना वायरस से संक्रमित भी थी। उल्लेखनीय है कि इस साल कोविड से हुई सभी मौतों में मरीज महिलाएं थीं।

पिछली चार मौतें भी महिलाओं की

इससे पहले रतलाम, खरगोन, इंदौर और मंडला में कोरोना से हुई चारों मौतें भी महिलाओं की थीं—किसी को टीबी, ब्रोंकाइटिस, हाई बीपी था, तो किसी को गर्भावस्था के दौरान संक्रमण हुआ। यह संकेत देता है कि कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों पर संक्रमण का खतरा अधिक बना हुआ है।

XFG वेरिएंट का बढ़ता असर

एम्स भोपाल की जीनोमिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अब XFG वेरिएंट सक्रिय है, जो पहले के LF.7 वेरिएंट से उत्पन्न हुआ है। 44 सैंपलों की जीनोम सीक्वेंसिंग में 28 सैंपलों (करीब 63.6%) में XFG पाया गया है, वहीं इसकी उप-प्रजाति XFG.3 भी 5 सैंपलों में पाई गई। NB.1 (निंबस) वेरिएंट राज्य में अब तक नहीं मिला। इसके लिए भोपाल से 14, ग्वालियर से 22, टीकमगढ़ से 2, और इंदौर, खरगोन, छिंदवाड़ा, ललितपुर, सीधी और गया से 1-1 सैंपल लिए गए थे। जीनोम अनुक्रमण करीब 15 दिनों तक चला, जिसके आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई।

टीका लगवा चुके लोग भी संक्रमित हो रहे

रिपोर्ट में बताया गया है कि XFG और LF.7 में ऐसे म्यूटेशन हैं, जो वैक्सीनेटेड लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं। हालांकि, इन मामलों में लक्षण सामान्य या बेहद हल्के होते हैं, और कई बार मरीजों को पता तक नहीं चलता। यही कारण है कि WHO ने इन्हें ‘Variant of Concern’ की बजाय ‘Variant Under Monitoring’ माना है। एम्स भोपाल के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि राज्य में SARS-CoV-2 के वेरिएंट्स पर नियमित निगरानी की जरूरत है। जीनोमिक सीक्वेंसिंग को अब एक सतत सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्य के रूप में अपनाया जाना चाहिए, ताकि समय रहते चेतावनी दी जा सके और महामारी से बेहतर ढंग से निपटा जा सके।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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