हम सभी ने कभी न कभी अपने घर, स्कूल, ऑफिस या किसी नेशनल फंक्शन में तिरंगा जरूर देखा और फहराया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस झंडे को फहराने या ध्वजारोहण के भी कुछ नियम होते हैं? क्या इसे किसी भी दिन लगाया जा सकता है? क्या हर तिरंगा एक जैसा बनाया जाता है? और आखिर इसे तैयार करने के पीछे इतनी बारीकियां क्यों रखी जाती हैं?
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आज 22 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज दिवस है, इसी दिन 1947 में, भारत की संविधान सभा ने तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में आधिकारिक तौर पर अपनाया था। ये खास हमें सिर्फ तिरंगे को सलाम करने का मौका नहीं देता। बल्कि उसके सम्मान और सही इस्तेमाल की जिम्मेदारी भी याद दिलाता है। तिरंगा भारत की पहचान, आजादी और एकता का प्रतीक है। इसलिए इसे लेकर छोटी-छोटी बातों की जानकारी भी हर नागरिक के पास होनी चाहिए। आइए आसान भाषा में जानते हैं कि तिरंगा कब फहराया जा सकता है, इसे बनाने के क्या नियम हैं और किन बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए।
क्या किसी भी दिन तिरंगा फहरा सकते हैं?
जी हां। अब आम नागरिक भी साल के किसी भी दिन अपने घर, दुकान, ऑफिस या संस्थान में तिरंगा फहरा सकते हैं। हालांकि, इसके साथ यह जिम्मेदारी भी आती है कि झंडे का सम्मान बना रहे। तिरंगा हमेशा साफ, सही स्थिति में और सम्मानजनक तरीके से लगाया जाना चाहिए।

National Flag Adoption Day 2026
तिरंगा बनाने के पीछे क्या-क्या नियम होते हैं?
तिरंगा सिर्फ तीन रंगों का कपड़ा नहीं है। इसे बनाने के लिए तय माप, रंग और डिजाइन का पालन किया जाता है।
- ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंग होता है।
- बीच की सफेद पट्टी में गहरे नीले रंग का अशोक चक्र बनाया जाता है।
- अशोक चक्र में हमेशा 24 तीलियां होती हैं।
- झंडे की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 रखा जाता है, ताकि हर तिरंगा एक जैसा दिखाई दे।
हर कपड़े का तिरंगा बन सकता है
तिरंगा बनाने के कुछ सख्त नियम हैं, लेकिन समय के साथ इन नियमों में कुछ बदलाव हुए हैं। पहले तिरंगा मुख्य रूप से खादी से बनाया जाता था, लेकिन अब सेट गाइडलाइन्स के अनुसार दूसरे कपड़ों से भी राष्ट्रीय ध्वज तैयार किया जा सकता है। फिर भी उसकी क्वालिटी, रंग और आकार तय मानकों के अनुसार ही होने चाहिए।
अगर तिरंगा खराब हो जाए तो क्या करें?
यह सवाल बहुत कम लोग पूछते हैं, लेकिन जानना जरूरी है। अगर तिरंगा फट जाए, रंग फीका पड़ जाए या इस्तेमाल लायक न रहे, तो उसे सम्मानजनक तरीके से अलग रखा जाना चाहिए। उसका निपटान भी गरिमा के साथ किया जाना चाहिए ताकि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान बना रहे।
तिरंगा हमें क्या सिखाता है?
तिरंगा सिर्फ राष्ट्रीय प्रतीक नहीं, बल्कि एक संदेश भी है। यह हमें अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद एकजुट रहने की प्रेरणा देता है। जब भी तिरंगा हवा में लहराता है, वह हमें याद दिलाता है कि देश की पहचान सिर्फ सीमाओं से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के सम्मान और जिम्मेदारी से बनती है।
