अयोध्या दान चोरी विवाद की जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज होने वाली बैठक बेहद अहम है। इस बैठक में ट्रस्ट के रिक्त पदों को भरने, नए महासचिव की नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी रिपोर्ट पर भी विचार-विमर्श हो सकता है।
ट्रस्ट के सदस्य स्वामी परमानंद गिरि ने मंगलवार को बताया कि न्यास में खाली पड़े पदों को भरना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान जो अन्य विषय सामने आएंगे, उन पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।
चढ़ावा चोरी मामले पर क्या बोले ट्रस्ट सदस्य?
राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी मामले को नई विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपने संबंधी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर स्वामी परमानंद गिरि ने कहा कि ट्रस्ट पहले मौजूदा एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार करेगा। उन्होंने कहा कि पहले मौजूदा एसआईटी की रिपोर्ट आने दीजिए। उसकी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।"
इस दौरान उन्होंने नई एसआईटी गठित किए जाने की जरूरत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा एसआईटी पर भरोसा नहीं है, तो केवल नई टीम बनाने से कोई विशेष अंतर नहीं पड़ेगा।
किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा?
ट्रस्ट सूत्रों के अनुसार, बैठक के एजेंडे में कई अहम प्रस्ताव शामिल हैं। इनमें
- नए महासचिव की नियुक्ति
- ट्रस्ट के तीन रिक्त ट्रस्टी पदों को भरना
- राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना
- कथित चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी रिपोर्ट पर चर्चा
क्यों खाली हुए ट्रस्ट के पद?
गौरतलब है कि हाल ही में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट ने छह जुलाई को हुई पिछली बैठक में उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे। इसके अलावा ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के निधन के बाद भी एक पद रिक्त हो गया है। हालांकि, ट्रस्टी दिनेंद्र दास के इस्तीफे की खबरों पर स्वामी परमानंद गिरि ने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।
6 जुलाई की बैठक में लिए गए थे अहम फैसले
6 जुलाई को हुई बैठक दान गबन का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की पहली बैठक थी। उस दौरान ट्रस्ट डीड में संशोधन संबंधी सुझाव देने के लिए एक विशेष समिति गठित की गई थी। साथ ही श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और अन्य अर्पणों की सुरक्षा, मूल्यांकन और निस्तारण के लिए नई दिशानिर्देश भी तैयार किए गए थे। पहले यह बैठक मणिराम छावनी में प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसे राम मंदिर परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था।
क्या है चढ़ावा चोरी का मामला?
राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन का मामला जून में सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की थी। जांच के बाद आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इस मामले की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी प्रस्तुत की जा चुकी है। बुधवार की बैठक पहले राम मंदिर परिसर में विशेष सत्र के रूप में होगी, जिसके बाद मणिराम छावनी में ट्रस्ट की नियमित बैठक आयोजित की जाएगी।
