भोपाल

Places Near Bhopal: उज्जैन में है कृष्ण-सुदामा का गुरुकुल, यहां और भी है बहुत कुछ खास, यहां जरूर विजिट करें

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 8, 2023, 11:11 PM IST

Best Places to Visit Near Bhopal 2023: उज्जैन मध्य प्रदेश का 5वां सबसे बड़ा व पौराणिक शहर है। यहां बाबा महाकाल बसते हैं, वहीं भगवान श्री कृष्ण व सुदामा की दीक्षा भी यहीं हुई थी। उज्जैन धार्मिक पर्यटन के लिहाज से सबसे बेस्ट सिटी है। शिप्रा नदी के तट पर बसे इस शहर का बड़ा पौराणिक महत्व है। यहां आपको मालवा के पारंपरिक व्यंजन चखने को मिलेंगे।

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भोपाल के पास उज्जैन में है कृष्ण-सुदामा का गुरुकुल (प्रतीकात्मक तस्वीर)

KEY HIGHLIGHTS
  • 12 साल में एक बार कुंभ का मेला सिंहस्थ लगता है यहां
  • 12 में से एक ज्योतिर्लिंग है बाबा महाकाल के रूप में विराजमान
  • कृष्ण व सुदामा की दीक्षा यहां संदीपनी आश्रम में हुई थी

Best Places to Visit Near Bhopal 2023: अगर इस बार आप विंटर वैकेशन में किसी पौराणिक शहर में जाने का प्लान कर रहे हैं तो आपके लिए बेस्ट डेस्टिनी है बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन। यह मध्य प्रदेश का पांचवा सबसे बड़ा शहर है जो मोक्ष दायिनी शिप्रा नदी के तट पर बसा है। इसे अवंतिका नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर 12 साल में एक बार कुंभ का मेला लगता है, जिसे सिंहस्थ कहते हैं। बता दें कि, यह राजा विक्रमादित्य की राजधानी थी, जबकि महाकवि कालीदास भी इसी नगरी से वास्ता रखते थे। भोपाल से इसकी दूरी करीब 210 किमी है, जबकि नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर महज 45 किमी दूर है। यहां पर सनातन धर्म के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक महालेश्वर ज्योतिर्लिंग है। यह पौराणिक शहर सनातन धर्म का कई अद्भुत गाथाओं का साक्षी रहा है।

कृष्ण व सुदामा का गुरुकुल था उज्जैन में

भगवान श्री कृष्ण व उनके सखा सुदामा की दीक्षा व शिक्षा उज्जैन में स्थित गुरु संदीपनी के गुरुकुल में हुई थी। हालांकि गुरु संदीपनी प्रमुख तौर पर काशी के रहने वाले थे, मगर वे अपने पुत्र के वियोग में यहां आ गए थे। यही वजह थी कि, भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा के साथ यहां शिक्षा व दीक्षा ली। बता दें कि, कृष्ण की एक पत्नी मित्रवृन्दा उज्जैन की ही राजकुमारी थी। गुरु संदीपनी का आश्रम देखने के लिए साल भर पर्यटकों की भीड़ रहती है। इसके अलावा यहां की एक और खास बात ये है कि, देश में सुरापान करने वाली काल भैरव की मूर्ति भी यहीं पर स्थापित है।

सम्राट विक्रमादित्य की नगरी रही है उज्जयिनी

सम्राट विक्रमादित्य उज्जैन के शासक थे उन्होंने शकों को परास्त कर उज्जैन में अपना साम्राज्य स्थापित किया और वे इस देश के महान सम्राट कहलाए। वहीं महाकवि कालिदास राजा विक्रमादित्य के दरबार के नवरत्नों में से एक थे। उज्जैन के इतिहास का प्रमाण 600 वर्ष पूर्व मिलता है। यहां पर कई पौराणिक एवं ऐतिहासिक पर्यटक स्थल हैं। यहां महाकालेश्वर मंदिर के अलावा गोपाल मंदिर, चौबीस खंभा देवी, चौसठ योगिनियां, नगर कोट की रानी, हरसिध्दि मां, मजार-ए-नज़मी, बिना नींव की मस्जिद, गज लक्ष्मी मंदिर, भर्तृहरि गुफा, पीरमछन्दर नाथ समाधि, कालिया देह महल, कोठी महल, घंटाघर, जंतर मंतर, चिंतामन गणेश आदि मुख्य हैं। यहां आपको लजीज दाल - बाफले, पोहे व कई पारंपरिक व्यंजन चखने को मिलेंगे।
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