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अकाल तख्त साहिब के सामने पेश हुए पंजाब सीएम, हर हुक्म स्वीकारने का किया ऐलान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान बुधवार को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख़्त साहिब के समक्ष एक विनम्र सिख के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने जत्थेदार साहिब के सामने अपने पूर्व बयानों को लेकर स्पष्टीकरण दिया और अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता में पूर्ण आस्था जताते हुए हर हुक्म को सिर-माथे स्वीकार करने की बात कही।

Bhagwant Mann Akal Takht

विनम्र सिख के रूप में अकाल तख्त साहिब पहुंचे सीएम मान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान बुधवार को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष एक विनम्र सिख के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने अकाल तख्त साहिब सचिवालय में जत्थेदार साहिब के सामने पेश होकर अपने पूर्व बयानों को लेकर स्पष्टीकरण दिया और संस्था की सर्वोच्चता में पूर्ण विश्वास जताया।

अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता में पूर्ण आस्था

सीएम मान ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की सत्ता को चुनौती देने की न तो उनकी हिम्मत है और न ही औकात। उन्होंने स्पष्ट किया कि अकाल तख्त साहिब से जो भी हुक्म होगा, वह उन्हें सिर-माथे स्वीकार होगा। जत्थेदार साहिब के समक्ष उपस्थित होने से उन्हें आंतरिक शांति, संतोष और गहरा सुकून मिला है।

विरोधियों के नैरेटिव को बताया बेबुनियाद

मुख्यमंत्री ने अकाल तख्त साहिब और पंजाब सरकार के बीच कथित टकराव की चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह विरोधी ताकतों द्वारा फैलाया गया झूठा नैरेटिव है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य केवल पंजाब की तरक्की और जनता की भलाई है।

लाखों संगत की भावनाओं का प्रतिनिधित्व

सीएम मान ने बताया कि उन्होंने जत्थेदार साहिब को 25,000 से 30,000 पन्नों की शिकायतें सौंपी हैं, जो लाखों संगत की भावनाओं को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि संस्थाएँ सर्वोच्च होती हैं, लेकिन उनके संचालन से जुड़े लोगों की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।

लापता सरूपों की जांच गैर-राजनीतिक

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लापता सरूपों को लेकर गठित एसआईटी की जांच का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है। इसका मकसद केवल पावन सरूपों का पता लगाना है। उन्होंने शिरोमणि कमेटी से प्रत्येक प्रकाशित सरूप का यूनिक कोड उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया। सीएम मान ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब का हर निर्णय उन्हें और उनके परिवार को स्वीकार्य है। उन्होंने दोहराया कि सिख धर्म की कुर्बानियों और शिक्षाओं को दुनिया भर में फैलाना उनका फर्ज है।

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