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Bankipur Bypoll: बांकीपुर के रण में उतरे प्रशांत किशोर, क्या बदल पाएंगे तीन दशक पुराना सियासी इतिहास? जानिए क्या कहते हैं जातीय समीकरण

Bankipur Bypoll: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव बेहद दिलचस्प और प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। इस सीट पर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर खुद मैदान में उतरकर भाजपा के अभेद्य किले को चुनौती दे रहे हैं।

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प्रशांत किशोर की एंट्री से मुकाबला हुआ हाई-प्रोफाइल (फोटो-एआई इमेज)

Bankipur Bypoll: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव इस समय राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार या फिर यूं कह लें मुखिया प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) के खुद चुनावी मैदान में उतरने से यह मुकाबला बेहद हाई-प्रोफाइल और प्रतिष्ठा की जंग में बदल गया है। पीके इस चुनाव (Who Win Bankipur) को अपनी साख और राजनीतिक भविष्य के 'जनमत संग्रह' के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत, ऐतिहासिक आंकड़े और जातीय समीकरण अभी भी भाजपा के पक्ष में झुके नजर आते हैं। इस लेख में हम आपको वहीं बताने जा रहे हैं।

बांकीपुर सीट को 1995 से भाजपा का अजेय किला माना जाता रहा है। पहले नवीन किशोर सिन्हा और फिर उनके बेटे और भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस सीट पर लगातार जीत दर्ज की। पिछले विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन को जहां लगभग 98,300 वोट (करीब 62%) मिले थे, वहीं आरजेडी प्रत्याशी को केवल 50 हजार के आसपास वोट मिले। उस वक्त जन सुराज (Jan Suraj Party) के उम्मीदवार को मात्र 7,700 वोटों से संतोष करना पड़ा था। इस बार भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा (Neeraj Kumar Sinha) को मैदान में उतारा है, जिनका स्थानीय स्तर पर मजबूत कनेक्शन माना जा रहा है।

भाजपा की कोर वोटर्स में सेंध लगा पाएंगे पीके?

जातीय गणित की बात करें तो बांकीपुर (Bankipur me kaun jitega) में निर्णायक भूमिका निभाने वाले कायस्थ मतदाता (14-15%) और अन्य सवर्ण जातियां पारंपरिक रूप से भाजपा की कोर वोटर रही हैं। पीके खुद ब्राह्मण चेहरा होने के नाते इस सवर्ण वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भाजपा (Bihar Politics) के सांगठनिक ढांचे को हिलाना उतना आसान नहीं है। दूसरी तरफ, विपक्षी खेमे यानी महागठबंधन में भी फूट दिख रही है। कांग्रेस जहां पीके को परोक्ष समर्थन देना चाहती थी, वहीं आरजेडी ने रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार बनाकर त्रिकोणीय संघर्ष खड़ा कर दिया है।

प्रशांत किशोर को लगा तगड़ा झटका

प्रशांत किशोर के लिए सबसे बड़ा झटका चुनाव से ठीक पहले अपनों की बगावत रही। जन सुराज के कई प्रमुख चेहरे और पदाधिकारी पार्टी छोड़कर 15 जुलाई को भाजपा में शामिल हो गए हैं। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद बिट्टू सिंह ने जहां पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा जताई, वहीं बागी नेता गोपाल सिंह ने प्रशांत किशोर पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें अहंकारी तक कह डाला। उन्होंने कहा कि अहंकारी व्यक्ति कभी संगठन नहीं चला सकता।

पीके की जीत से जन सुराज का राज्य में बढ़ेगा ग्राफ

हालांकि, पीके लगातार घर-घर जाकर शिक्षा, रोजगार और बदलाव के मुद्दों पर वोट मांग रहे हैं, जिससे शहरी महिला और युवा मतदाता प्रभावित दिख रहे हैं। यदि पीके यहां सम्मानजनक वोट पाते हैं, तो जन सुराज का ग्राफ बढ़ेगा लेकिन यदि भाजपा यह सीट गंवाती है, तो यह मौजूदा सरकार के लिए बड़ा झटका होगा। हालांकि अंतिम फैसला तो बांकीपुर के वोटरों के हाथ में है, जो 30 जुलाई को वोट डालेंगे और 3 अगस्त को नतीजे हम सभी के सामने होंगे।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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