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बागपत का अनूठा मॉडल, शिवलिंग पर चढ़े दूध से होगी पशु सेवा और फूलों से बनेगी खाद

बागपत के पुरा महादेव मंदिर में जिलाधिकारी अस्मिता लाल की अगुवाई में इस महाशिवरात्रि 'जीरो वेस्ट' पहल चलाई जा रही है। यहां शिवलिंग पर चढ़ाया गया दूध अब बर्बाद होने के बजाय पशुओं को पिलाया जा रहा है और चढ़ाए गए फूलों से खाद बनाई जा रही है। आइए जानते हैं इस खास पहल के बारे में।

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जिलाधिकारी की 'जीरो वेस्ट' पहल

Photo : Times Now Digital

Baghpat News: बागपत के ऐतिहासिक पुरा महादेव मंदिर में इस बार फाल्गुन माह का जलाभिषेक उत्सव केवल भक्ति और श्रद्धा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और बेजुबान पशुओं की सेवा का एक सुंदर उदाहरण बनकर उभरा है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल की अगुवाई में इस धार्मिक आयोजन को 'जीरो वेस्ट महोत्सव' में बदल दिया गया है। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया दूध अब नालियों में बहकर व्यर्थ नहीं जा रहा, बल्कि इसे सहेजकर पशुओं के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

आस्था और सेवा का अनूठा संगम

हर साल की तरह इस बार भी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड से लाखों की संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर पुरा महादेव पहुंचे। आम तौर पर ऐसे बड़े आयोजनों में चढ़ाया गया दूध और फूल कचरे का हिस्सा बन जाते हैं, लेकिन बागपत प्रशासन ने इस बार परंपरा के साथ आधुनिक प्रबंधन को जोड़ा है। मंदिर में चढ़ने वाले सैकड़ों लीटर दूध को विशेष रूप से इकट्ठा किया जा रहा है। इस दूध को साफ करने और छानने के बाद गौशालाओं के अनाथ बछड़ों को उपलब्ध कराया जा रहा है और साथ ही डॉग फीडिंग की व्यवस्था भी की गई है। इस मानवीय दृष्टिकोण ने श्रद्धालुओं के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजा है।

स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता

मंदिर परिसर को पूरी तरह कूड़ा-मुक्त रखने के लिए जिलाधिकारी ने कार्ययोजना तैयार की है। भक्तों द्वारा भगवान शिव को अर्पित किए गए फूलों को अब फेंका नहीं जाएगा, बल्कि उनकी प्रोसेसिंग कर जैविक खाद बनाई जा रही है। इसके साथ ही प्लास्टिक के कचरे को कम करने के लिए प्रशासन ने एक ठोस कदम उठाते हुए मंदिर क्षेत्र में वॉटर कियोस्क स्थापित किए हैं, ताकि लोग प्लास्टिक की छोटी बोतलों का कम से कम उपयोग करें। जगह-जगह डस्टबिन लगाने और स्वच्छता वॉलंटियर्स की तैनाती से मंदिर का वातावरण गरिमामय बना हुआ है।

सुरक्षा का अभेद्य किला और हाई-टेक निगरानी

लाखों की भीड़ को सुरक्षित दर्शन कराने के लिए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पूरे मंदिर परिसर की गतिविधियों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए कंट्रोल रूम से पैनी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा का स्तर इतना ऊंचा है कि शिवालय के भीतर भी पुलिसकर्मियों को सादी वर्दी में तैनात किया गया है, ताकि वे सामान्य भक्तों के बीच रहकर सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता कर सकें। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा और किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी हर समय अलर्ट मोड पर हैं।

धार्मिक आयोजनों के लिए बागपत बना रोल मॉडल

स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से आए कांवड़ियों ने प्रशासन की इन व्यवस्थाओं की जमकर सराहना की है। बागपत का यह 'जीरो वेस्ट' मॉडल इस बात का प्रमाण है कि यदि सही प्रबंधन और नेक नीयत हो, तो बड़े से बड़े धार्मिक आयोजनों को भी पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है। यह पहल न केवल आस्था का सम्मान करती है, बल्कि प्रकृति और जानवरों के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी बेहतर दिखाती है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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