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यह सिर्फ चोरी नहीं, सीधे डकैती है... चंपत राय के इस्तीफे पर भड़के अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद; सुप्रीम कोर्ट के दखल की मांग

Ram Mandir Donation Row: अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी को 'डकैती' करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की है। सीपीआई नेता डी राजा ने इसे सिर्फ शुरुआत बताया।

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सुप्रीम कोर्ट से दखल देने और हाई-लेवल जांच की मांग (फाइल फोटो | PTI)

Photo : PTI

Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और चंदे की राशि में हुई कथित हेराफेरी का मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने सरकार और ट्रस्ट को चौतरफा घेरना शुरू कर दिया है। अयोध्या से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद ने शुक्रवार को इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीर बताते हुए इसे 'साधारण चोरी' नहीं बल्कि 'डकैती' करार दिया है। उन्होंने दोनों शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे की टाइमिंग पर भी कड़े सवाल खड़े किए हैं।

"जांच शुरू होते ही इस्तीफा क्यों नहीं दिया?" - अवधेश प्रसाद

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने मांग की कि इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा को उसी समय इस्तीफा दे देना चाहिए था जब इस मामले की जांच शुरू हुई थी, या फिर तब जब यह घोटाला असल में अंजाम दिया जा रहा था। यह कोई साधारण या छोटा मामला नहीं है। यह किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध पूरे देश से है। देश के कोने-कोने से लोग भगवान श्रीराम के मंदिर में दर्शन करने आते हैं। इसे महज एक चोरी नहीं कहा जा सकता, यह सीधे तौर पर डकैती है।

अवधेश प्रसाद ने आगे कहा कि उनकी पार्टी और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने ही सबसे पहले इस मुद्दे को उजागर किया था और इस महाघोटाले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की थी। अब सुप्रीम कोर्ट को खुद इस मामले का संज्ञान लेकर एक विशेष टीम का गठन करना चाहिए।

"यह तो सिर्फ आइसबर्ग का सिरा है" - डी राजा

सपा के साथ-साथ वामपंथी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने भी इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जो खुलासे अभी सामने आ रहे हैं, वे इस पूरे घोटाले का एक छोटा सा हिस्सा मात्र हैं।

डी. राजा ने बयान जारी कर कहा कि जब यह चढ़ावा चोरी का मामला पहली बार जनता के सामने आया था, तभी हमारी पार्टी ने उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की थी। अब इस मामले में 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई है और ट्रस्ट के दो बड़े नेताओं ने इस्तीफा दिया है। लेकिन हम जानते हैं कि यह सिर्फ 'टिप ऑफ द आइसबर्ग' (शुरुआत) है। इस पूरे नेक्सेस की गहराई से जांच होनी चाहिए। आस्था की कमाई को लूटने वाले हर एक दोषी को सजा मिलनी चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक जो भी किया है, वह काफी नहीं है।

BNS की गंभीर धाराओं के तहत दर्ज है FIR, 8 आरोपी नामजद

आपको बता दें कि यह राजनीतिक घमासान उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में दर्ज हुई एफआईआर (FIR) के बाद तेज हुआ है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें धारा 306 (सेवक/लिपिक द्वारा चोरी), 316(5) (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट), 317(4) व 317(5) (धोखाधड़ी), 61 (आपराधिक साजिश) और 3(5) शामिल हैं।

पवन पांडे के आरोपों के बाद बैठी थी SIT

यह पूरा विवाद अयोध्या के पूर्व सपा विधायक पवन पांडे के उन आरोपों के बाद शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि राम मंदिर के दानपात्रों और चंदे से करीब 7 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है। इन आरोपों के बाद खुद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 14 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ही अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चंपत राय व अनिल मिश्रा ने अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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