UP Rajya Sabha Chunav: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने राज्य की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने अपनी सरकार के शुरुआती दिनों से ही एकतरफा और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया हुआ है। अखिलेश यादव के मुताबिक, प्रदेश में सबसे ज्यादा अन्याय और भेदभाव 'पीडीए' यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के साथ किया जा रहा है।
एएनआई के मुताबिक पत्रकारों से बातचीत करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि सरकार की इस कार्यशैली पर देश की अदालतें भी कई मौकों पर कड़ा संज्ञान ले चुकी हैं। उनका यह बयान उस वक्त आया जब पार्टी के दो वरिष्ठ नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवाणी-उत्तर प्रदेश से आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करने पहुंचे थे। इस दौरान अखिलेश यादव खुद दोनों नेताओं के साथ मौजूद रहे और औपचारिक रूप से चुनावी मुकाबले में उतरने का ऐलान किया।
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तीसरा उम्मीदवार उतारेगी समाजवादी पार्टी
वहीं, जब रामगोपाल यादव से यह पूछा गया कि क्या समाजवादी पार्टी राज्यसभा के लिए किसी तीसरे उम्मीदवार को भी मैदान में उतारेगी, तो उन्होंने इसका फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर छोड़ दिया। कई दशकों से उच्च सदन का हिस्सा रहे रामगोपाल यादव ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे पिछले 34 सालों से उम्मीदवार बनते आ रहे हैं और अब अगले 6 सालों के लिए फिर से तैयार हैं।
11 सीटों के लिए होंगे राज्यसभा चुनाव
सपा के इन नामांकनों के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या सपा अपने तीनों प्रत्याशियों में पीडीए फॉर्मूले का सही से ध्यान रखेगी? उन्होंने सपा को तीसरा उम्मीदवार उतारने के जोखिम को लेकर सतर्क भी किया।
बता दें कि चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की 1 सीट समेत कुल 11 सीटों पर राज्यसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इसके लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 255 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, लेकिन अखिलेश यादव लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में गड़बड़ियां की गई थीं। फिलहाल, राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश का सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ चुका है।
