असम में मानसूनी बारिश और नागालैंड की पहाड़ियों से आरे पानी के तेज प्रवाह से नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। अधिकांश हिस्सों पर बाढ़ का खतरा बना हुआ है। बाढ़ की त्रासदी से सबसे ज्यादा तीन जिले प्रभावित बताये जा रहे हैं, जिसमें शिवसागर जिला ज्यादा मार झेल रहा है। इस आपदा में संपत्ति के साथ जान माल का भी नुकसान हुआ है, जिससे लोगों को पलायन होने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इस भयावहता के बीच टाइम्स नाउ नवभारत की टीम बाढ़ग्रस्त क्षेत्र पर पहुंची है, जहां हालात बदतर नजर आ रहे हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत के संवाददाता गौरव श्रीवास्तव ने आपदाग्रस्त शिवसागर जिले के नेपाली खुटी में प्रभावित लोगों से बातचीत की। स्थानीय लोगों ने बताया कि नागालैंड की ओर से आ रहे फ्लैश फ्लड ने सबकुछ तबाह कर दिया है। अचानक आई बाढ़ से पूरा इलाका डूब गया और घरों के साथ मवेशी, गाड़ियां और कुछ लोग बह गए। पानी के तेज बहाव में कई लोगों के बहने की बात सामने आई है। पूरे इलाके में दलदल है और बदबू से हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। हालांकि, प्रशासन ने राहत बचाव कार्य जारी कर रखा है, लेकिन व्यापक रूप से आई त्रासदी से त्वरित निपट पाना मुश्किल लग रहा है। लोगों तक दवाइयां और खाना पहुंचाया जा रहा है, लेकिन ये नाकाफी है। अभी भी लोग डरे हुए हैं और हालात के सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
बाढ़ से मरने वालों की संख्या 80
राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों द्वारा लिए गए सभी प्रकार के ऋणों की अदायगी पर छह महीने की मोहलत (मोराटोरियम) की घोषणा की है। उसने अभूतपूर्व बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित लोगों के राहत और पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से सहायता पैकेज की मांग भी की है। अधिकारियों ने बताया कि शिवसागर जिले में दो और लोगों की जान चली गई जिसके साथ ही इस वर्ष आई विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है।
गोलाघाट, शिवसागर, विश्वनाथ, चराइदेव, कामरूप (महानगर), जोरहाट, धेमाजी और नौगांव जिलों के कुल 21 राजस्व मंडल और 437 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ से 2,12,400 लोग प्रभावित हुए हैं। उसका सबसे बुरा असर चराइदेव जिले पर पड़ा है जहां लगभग 80,000 लोग प्रभावित हैं। शिवसागर में 71,000 और जोरहाट में 40,000 लोग बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं। हालांकि, बुधवार की तुलना में स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है।
प्रशासन चार जिलों में 112 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित कर रहा है, जहां फिलहाल 75,583 प्रभावित लोगों को शरण दी गई है। भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, पुलिस और नागरिक एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं।
इस बीच, मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की एक विशेष बैठक में शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में ऋण लेने वाले ग्राहकों के लिए एक राहत योजना पर फैसला किया गया। इस बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), भारतीय स्टेट बैंक (एबीआई) और सभी वाणिज्यिक बैंकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
