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500 के नोट पर गांधी की जगह छपे अनुपम खेर! 1.60 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा; शातिरों ने यूं किया खेल

गुजरात के अहमदाबाद में सोने की खरीददारी में अनुपम खेर की तस्वीर वाले 500 रुपये के नोटों से 1.60 करोड़ चुकाए गए। फिलहाल, इतना बड़ा फर्जीवाड़ा करने वाले गिरफ्तार कर लिये गए हैं।

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500 नोट के पर अनुपम खेर की तस्वीर

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

अहमदाबाद: असली सोना नकली नोटों से खरीदा गया। दरअसल, मामला गुजरात के अहमदाबाद का है, जहां सोने के 20 बिस्किट 1 करोड़ 60 लाख रुपए में खरीदे गए, जिसमें रुपये अनुपम खेर के चेहरे वाली नकली नोट से चुकाए गए। जालसाज ने अहमदाबाद के सराफा कारोबारी को चूना लगाया और फरार हो गए। यह पूरा फर्जीवाड़ा 1.60 करोड़ रुपये का है। फिलहाल, इस कारनामे को अंजाम देने वाले अपराधी गिरफ्तार कर लिए गए हैं।

ऐसे किया खेल

अहमदाबाद के सीजी रोड स्थित आंगड़िया फर्म में सोना डिलीवर करना और रुपये कलेक्ट करना तय हुआ था, जिसके तहत तीनों आरोपी आंगड़िया फर्म के पास नोट गिनने की मशीन और नोट लेकर खड़े थे। सोने की डिलीवरी के समय आरोपियों ने व्यापारी के कर्मचारियों को रुपये का भुगतान किया, जिसमे 1.30 करोड़ बच्चों को नोट दिये गये। आरोपी ने उससे कहा कि बाकी 30 लाख रुपये गिनकर अगले ऑफिस से ले आओ। जब व्यापारी को घटना के बारे में पता चला तो उसने नवरंगपुरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

मामले में क्राइम ब्रांच ने करीब 20 दिन में केस की गुत्थी सुलझाते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने फिल्म की शूटिंग के नाम पर करोड़ों रुपए की नकली नोट अनुपम खेर के चेहरे वाली छपवाई और सराफा व्यापारी को चूना लगाकर फरार हो गए थे। हालांकि, पुलिस ने मामले की गुत्थी सुलझाते हुए 20 में से 18 सोने के बिस्किट की रिकवरी तक की है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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