Anil Vij News: हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज एक बार फिर अपने सख्त तेवर के कारण चर्चा में हैं। इस बार कैथल में आयोजित जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब एक पुलिसकर्मी के सस्पेंशन को लेकर विज और जिले की SP उपासना सिंह के बीच जोरदार बहस हो गई। भरी सभा में दोनों के बीच हुई इस नोकझोंक का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जमीन धोखाधड़ी का मामला बना विवाद की जड़
मामला करनाल पुलिस में तैनात ASI संदीप कुमार से जुड़ा है। आरोप है कि संदीप ने जमीन बेचने के नाम पर एक व्यक्ति से 7 लाख रुपये एडवांस लिए, लेकिन कागजात फर्जी निकलने पर न तो जमीन दी और न ही पैसे लौटाए। जांच में सामने आया कि आरोपी पुलिसकर्मी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच को प्रभावित किया। जब यह शिकायत मंत्री अनिल विज के सामने पहुंची, तो उन्होंने मौके पर ही ASI को सस्पेंड करने का फरमान सुना दिया।
'पावर नहीं तो उठकर चली जाओ'
मंत्री के आदेश पर SP उपासना सिंह ने स्पष्ट किया कि आरोपी पुलिसकर्मी दूसरे जिले में तैनात है, इसलिए नियमों के मुताबिक वह उसे सीधे सस्पेंड नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि वह केवल उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेज सकती हैं। SP की इस दलील पर विज भड़क गए और सख्त लहजे में कहा, "अगर आपके पास पावर नहीं है, तो आप इस बैठक से उठकर चली जाएं।" विज ने जोर देकर कहा कि उनके आदेश की पालना होनी चाहिए और डीजीपी को उनके नाम से पत्र लिखा जाए।
बहस के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने भी एसपी को टोका, जिस पर हॉल में मौजूद जनता ने तालियां बजाईं। विज का तर्क था कि मंत्री के आदेश से बड़ी कोई पावर नहीं है। हालांकि, SP उपासना अपनी बात पर अडिग रहीं कि प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई संभव है। थोड़ी देर तक चली इस तनातनी के बाद मामला तब शांत हुआ जब SP ने यह माना कि वह मंत्री के आदेश का हवाला देकर संबंधित DIG और उच्च अधिकारियों को निलंबन के लिए पत्र लिखेंगी।
पहले भी हुआ है विज बनाम अफसर
यह पहली बार नहीं है जब अनिल विज और पुलिस अधिकारियों के बीच इस तरह की तकरार हुई हो। इससे पहले भी वह तत्कालीन एसपी संगीता कालिया को एक बैठक के दौरान 'गेट आउट' कह चुके हैं। विज अक्सर अपनी बैठकों में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं। हालांकि बाद में विज ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि "चाहे मैं हूं या कोई अधिकारी, हम सब इसीलिए हैं कि जनता को न्याय मिले और इसी कारण हमें लोगों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए... मैंने SP को सस्पेंड करने के लिए नहीं कहा; जिसके पास अधिकार है, उसे बताया जाना चाहिए कि मैंने सस्पेंड करने के आदेश दिए हैं।"
