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मेरठ के कपल ने जिस मंदिर में रचाई शादी, जानें उस त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में सब कुछ

मेरठ के एक जोड़े ने डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए त्रियुगीनारायण मंदिर को चुना। यह वही मंदिर है, जहां पर मान्यता के अनुसार भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था। शादी के रीति-रिवाजों के बीच बर्फबारी ने मेरठ के इस कपल का दिन बना दिया। शादी के बाद बर्फ के बीच चलते हुए उनका वीडियो वायरल हो रहा है। चलिए त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Triyuginarayan Temple.

त्रियुगीनारायण मंदिर

इन दिनों डेस्टिनेशन वेडिंग का चलन जोरों पर है। जहां ज्यादातर लोग डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए खूबसूरत समुद्री बीच या पहाड़ों के बीच अद्भुत जगह को चुनते हैं। वहीं मेरठ के एक कपल ने ऐसी जगह चुनी, जिसके बारे में आपने सोचा भी नहीं होगा।

इस जगह का संबंध भगवान शिव से है और मजेदार बात यह हुई कि जब यह जोड़ा शादी के बंधन में बंधा तो वहां जमकर बर्फबारी भी होने लगी। इस तरह इस जोड़े का शादी समारोह यादगार होने के साथ ही दर्शनीय भी हो गया। अब उनका वीडियो इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहा है, जिसमें बर्फबारी के बीच दूल्हा-दुल्हन आते दिख रहे हैं।

कहां की शादी

मेरठ के इस जोड़ने ने अपनी शादी के लिए उत्तराखंड में त्रियुगीनारायण मंदिर को चुना। इस जोड़े को भी शायद अंदाजा नहीं होगा कि वह बर्फबारी के बीच शादी के बंधन में बंधेंगे। बसंत पंचमी के दिन इस जोड़े ने त्रियुगीनारायण मंदिर में सात फेरे लिए। कहा जाता है कि यहीं पर भगवान शिव और देवी पार्वती भी विवाह के बंधन में बंधे थे। इस जोड़े को बर्फबारी का जरा भी अंदाजा नहीं था, लेकिन जैसे ही उनकी शादी के रीति-रिवाज पूरे हुए, वहां बर्फबारी होने लगी।

शादी होते ही बदल गया नजारा

त्रियुगीनारायण मंदिर में शादी करने के बाद जब यह जोड़ा मंदिर से बाहर निकला तो नजारा बदल चुका था। बर्फबारी के बीच चलते हुए उनका वीडियो इंस्टाग्राम पर जैसे ही अपलोड हुआ, वायरल हो गया। वीडियो में दुल्हन के पीछे एक महिला दुल्हन का लहंगा उठाए हुए च रही है, ताकि वह जमीन पर गिरी बर्फ से गीला न हो जाए। दूल्हे ने अपनी शेरवानी के ऊपर लेयरिंग की हुई है, ताकि ठंड से बचा रहे। बर्फबारी के बीच भीषण ठंड में दोनों मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते हुए दिखते हैं।

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मेरठ के जोड़े ने त्रियुगीनारायण मंदिर में रचायी शादी

कहां है त्रियुगीनारायण मंदिर

त्रियुगीनारायण मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मौजूद है। यह मंदिर धार्मिक आस्था और पौराणिक मान्यताओं का एक बहुत ही महत्वपूर्ण केंद्र है। यह मंदिर चारधाम यात्रा मार्ग पर केदारनाथ के रास्ते में है। मंदिर हर साल देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। ज्ञात हो कि रुद्रप्रयाग स्वयं हिमालय के पंच प्रयागों में से एक है, जहां अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का संगम होता है। रुद्रप्रयाग से ही केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वाले मार्ग अलग-अलग होते हैं।

पुरोहित बन ब्रह्मा ने करवाया शिव-पार्वती का विवाह

त्रियुगीनारायण नाम तीन शब्दों से मिलकर बना है—‘त्रि’ यानी तीन, ‘युग’ अर्थात काल और ‘नारायण’ भगवान विष्णु का एक नाम। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल के रूप में है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह का आयोजन स्वयं भगवान विष्णु ने किया था। ब्रह्मा जी ने उस विवाह में पुरोहित की भूमिका निभाई थी। इसीलिए यह मंदिर आज भी पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों से विवाह करने के लिए प्रसिद्ध है और हर साल कई जोड़े यहां आकर विवाह के बंधन में बंधते हैं।

शिव-पार्वती के विवाह से अब तक जल रही धूनी

मंदिर की संरचना बहुत ही सरल है। त्रियुगीनारायण मंदिर की वास्तुकला केदारनाथ मंदिर से मिलती-जुलती है, लेकिन इसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। मंदिर के सामने मौजूद अखंड धूनी विशेष आस्था का केंद्र है। माना जाता है कि यह अग्नि शिव-पार्वती के विवाह के दिन से आज तक निरंतर जल रही है। श्रद्धालु यहां आकर लकड़ी अर्पित करते हैं और धूनी की भस्म अपने साथ लेकर जाते हैं, जिसे वैवाहिक जीवन में सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है।

यहां पर हुए शिव-पार्वती के सात फेरे

मंदिर परिसर में ब्रह्म शिला भी है। इस ब्रह्म शिला को वह स्थान माना जाता है, जहां शिव-पार्वती विवाह बंधन में बंधे थे और सात फेरे लिए थे। इसके अलावा यहां पर चार पवित्र कुंड - रुद्र कुंड, ब्रह्म कुंड, विष्णु कुंड और सरस्वती कुंड भी हैं। इन सभी कुंडों का धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष महत्व है। त्रियुगीनारायण मंदिर न सिर्फ आस्था, बल्कि संस्कृति और परंपरा का भी जीवंत प्रतीक माना जाता है।

कैसे पहुंचें त्रियुगीनारायण मंदिर

त्रियुगीनारायण मंदिर दिल्ली से सोनप्रयाग मार्ग पर करीब 400 किमी दूर है। ऋषिकेश, श्रीनगर और रुद्रप्रयाग होते हुए आप यहां तक पहुंच सकते हैं। सोनप्रयाग से आप शेयर्ड जीप या लोकल कार लेकर मंदिर तक पहुंच सकते हैं। अगर ट्रेन से आ रहे हैं तो आपको हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंचकर सड़क मार्ग से पहुंचना होगा। यहां का नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून में जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जहां से आप 6-7 घंटे की सड़क यात्रा करके त्रियुगीनारायण मंदिर पहुंच सकते हैं।

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Digpal Singh
Digpal Singh author

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी... और देखें

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